कोरोना वायरस और उसके चलते देश दुनिया में आवागमन पर रोक के मद्देनजर आर्थिक लगत बढ़ी और इसी वहज से देश की वृद्धि दर घटने का अनुमान है। वर्ष 2019 में वृद्धि पांच फीसदी रहने का आकलन है। वैश्विक महामारी कोरोना से निपटने के लिए पूरे देश में 14 अप्रैल तक पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की गई है।
आय में हो सकती है तेज गिरावट
इस संदर्भ में मूडीज ने कहा है कि अनुमानित वृद्धि दर के हिसाब से भारत में 2020 में आय में तेज गिरावट हो सकती है। इससे 2021 में घरेलू मांग और आर्थिक स्थिति में सुधार की दर पहले से अधिक प्रभावित हो सकती है।
इसलिए आ रही है बाधा
एजेंसी ने कहा कि, ‘‘भारत में बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के पास नकद धन की भारी कमी के चलते भारत में कर्ज हासिल करने को लेकर पहले से ही बड़ी बाधा चल रही है।’’
Fitch ने भी घटाया था अनुमान
इससे पहले फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) ने देश की GDP विकास दर का अनुमान घटाया था। रेटिंग एजेंसी ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए GDP ग्रोथ को घटाकर 5.1 फीसदी कर दिया है। इससे पहले फिच रेटिंग्स ने दिसंबर 2019 में भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 5.6 फीसदी लगाया था।
S&P ने इतना जताया था अनुमान
S&P ग्लोबल रेटिंग एजेंसी ने 2020 में भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान घटाकर 5.2 फीसद कर दिया है। S&P की तरफ से यह भी कहा गया है कि कोरोनावायरस महामारी के चलते दुनियाभर की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर में जा रही है। यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एजेंसी ने 2020 में भारत के जीडीपी ग्रोथ को 5.7 फीसद की रेटिंग दी थी।
बार्कलेज ने घटाया वृद्धि दर का अनुमान
शोध-सलाह कंपनी बार्कलेज ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए वृद्धि दर के अनुमान में 1.7 फीसदी की कटौती कर इसके 3.5 फीसदी रहने का अनुमान व्यक्त किया था। उसने कहा था कि, 'हमारा अनुमान है कि राष्ट्रव्यापी बंदी की कीमत करीब 120 अरब डॉलर यानी जीडीपी के चार फीसदी के बराबर रह सकती है।'