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Adani Group: कांग्रेस ने अदाणी मामले में विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर उठाए सवाल, कहा- निष्कर्ष पूर्वानुमानित

Fri, 19 May 2023 06:57 PM IST
गुलाम अहमद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अदाणी मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि उनकी पार्टी का शुरू से यह कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ पैनल मोदानी घोटाले की जटिलता को उजागर करने में असमर्थ होगा।
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Congress Leader Jairam Ramesh - फोटो : PTI (File Photo)
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विस्तार
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कांग्रेस ने अदाणी समूह-हिंडनबर्ग मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं। अदाणी समूह को शेयरों से कथित छेड़छाड़ मामले में क्लीनचिट दिए जाने पर कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने शुक्रवार को कहा कि समिति के निष्कर्ष पूर्वानुमान के मुताबिक हैं। उन्होंने कहा कि यह बात पूरी तरह गलत है कि अदाणी समूह को क्लीनचिट मिल गई है।

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जयराम रमेश ने एक बार फिर अदाणी मामले की जांच संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी का शुरू से यह कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ पैनल के पास इस घोटाले की जटिलता को उजागर करने के लिए बेहद सीमित अधिकार क्षेत्र हैं। यह मोदानी घोटाले को उजागर करने में असमर्थ और अनिच्छुक भी होगा।

विशेषज्ञ समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सेबी को विदेश की कंपनियों से अदाणी समूह में धन प्रवाह में कथित उल्लंघनों की अपनी जांच में कुछ गलत नहीं मिला है। हालांकि, छह सदस्यीय पैनल ने कहा है कि यूएस-आधारित हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट से पहले अदाणी समूह के शेयरों में शॉर्ट पोजीशन बनाने के सबूत हैं और रिपोर्ट के प्रकाशन के बाद कीमतों में गिरावट के बाद शॉर्ट सेलर को लाभ हुआ। 
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इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जयराम रमेश ने ट्विटर पर एक पोस्ट में रिपोर्ट को लेकर पांच मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के दावों के विपरीत समिति ने पाया है कि नियम अपारदर्शिता की दिशा में चले गए हैं, जो लाभकारी स्वामित्व को सुविधा प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि जांच समिति किसी निष्कर्ष पर पहुंचने में विफल रही है, इसलिए यह कहना गलत है कि कोई नियामकीय गड़बड़ी नहीं हुई है।

रमेश ने आगे कहा कि सेबी इस बात से संतुष्ट नहीं है कि एफपीआई को धन देने वाली विदेशी फर्मों का अदाणी समूह से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जब अदाणी समूह की कंपनी के शेयर की कमत 1,031 रुपये से बढ़कर 3,859 रुपये हो गई, तब एलआईसी ने 4.8 करोड़ शेयर खरीदे, जो सवाल उठाता है कि एलआईसी ने किसके हित में शेयर खरीदने का फैसला किया।

बता दें, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि इसका कोई संकेत नहीं मिला है कि अदाणी समूह ने हाल के वर्षों में कोई नियामक गड़बड़ी की है। साथ ही स्टॉक से छेड़छाड़ का कोई स्पष्ट सबूत नहीं मिला है, जिससे कंपनी को जिम्मेदार ठहराया जा सके।

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