बीजद सांसद भर्तृहरि महताब ने कहा, सरकार इसके जरिये कुछ अपराधों को खत्म करना चाहती है और दूसरे अपराधों के लिए सजा को घटाना चाहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि बिल ऐसे समय ही क्यों लाया जा रहा है जब एक बड़ा निजी बैंक संकट से जूझ रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रवर्तकों की हरकतों के चलते कई कंपनियां अपना बोरिया बिस्तर समेट रही हैं। महताब से सुर मिलाते हुए टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा, साफ प्रतीत होता है कि सरकार उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से खासा प्रभावित है और उन्हें खुश करने के लिए यह बिल लाई है।
सौगत ने कहा कि यस बैंक के सीईओ ईडी की हिरासत में हैं और सरकार कुछ अपराधों को कम या खत्म करने की जुगत लगा रही है और इसे व्यापार सुगमता का नाम दिया जा रहा है।
बिल लाने के लिए केंद्र पर निशाना साधते हुए लोकसभा में कांग्रेस दल के नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ये सरकार उद्योग से और उद्योग के लिए है। इसे उद्योगपतियों के अलावा और कोई नहीं दिखता। सरकार उद्योग जगत की सामाजिक जिम्मेदारियों को लगातार कमतर कर रही है ताकि कारपोरेट जगत को खुश कर सके।