भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच हुए सीईपीए दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के नए अवसरों के द्वार खोलेगा। साथ ही इससे छोटे-मझोले उद्योगों और स्टार्टअप को फायदा होगा। कोरोना महामारी के बावजूद रिकॉर्ड वक्त में सीईपीए को हकीकत में बदलने के लिए दोनों देशों का नेतृत्व सराहना योग्य है। - संजय मेहता, अध्यक्ष फिक्की
भारत 1,515 डॉलर की कीमत के परिधान यूएई को आपूर्ति करता है जबकि उसका कुल आयात 3,517 मिलियन डॉलर है। इस तरह भारत परिधान निर्यात की हिस्सेदारी 43 फीसदी है। सीईपीए से भारतीय रेडीमेड कपड़ों पर 5 फीसदी आयात शुल्क में कमी आएगी। इससे यूएई में भारतीय परिधानों की स्थिति और मजबूत होगी। - नरेंद्र गोयनका, चेयरमैन परिधान निर्यात संवर्धन परिषद
बड़ी मात्रा में भारतीय प्रवासियों की वजह से यूएई में भारतीय अनाज, फलों, सब्जियों, चाय, मसालों, चीनी आदि का उपभोग बड़ी मात्रा में होता है। ट्रेवल, पर्यटन, परिवहन, आईटी, आईटीईएस और कंस्ट्रक्शन सेवाओं में लगी भारतीय कंपनियों को फायदा होगा। - ए सक्तीवेल, अध्यक्ष फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन
यूएई लेदर सेक्टर के लिए अहम बाजार है और इससे यूरोपीय संघ और अफ्रीका के देशों में पहुंच मिलेगी। इस समझौते से निर्यात और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। - संजय लेखा, चेयरमैन काउंसिल फॉर लेदर एक्सपोर्ट