चीन की अर्थव्यवस्था का इस साल वैश्विक आर्थिक विकास का एक तिहाई हिस्सा चलाने में योगदान रहा। ऐसे में हाल के महीनों में चीन में बढ़ रही नाटकीय मंदी पूरी दुनिया के लिए खतरे की घंटी की तरह है। चीन में निर्माण सामग्री से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक के आयात में गिरावट के कारण विभिन्न देशों के नीति निर्माता अपनी अर्थव्यवस्थाओं में नुकसान से आशंकित हैं। कैटरपिलर नामक कंपनी का कहना है कि निर्माण स्थलों पर उपयोग की जाने वाली मशीनों की मांग चीन में पहले की तुलना में कम हुई है।
वैश्विक निवेशक पहले ही चीन के शेयर बाजारों से 10 अरब डॉलर से अधिक की निकासी कर चुके हैं, इनमें अधिकांश बिक्री ब्लू चिप्स में हुई है। गोल्डमैन सैक्स ग्रुप और मॉर्गन स्टेनली ने चीनी इक्विटी के लिए अपने लक्ष्यों में कटौती की है, इसके अलावे चीन के आर्थिक परिदृश्य में और ज्यादा चुनौती की चेतावनी दी गई है। अफ्रीका के देशों के साथ एशियाई अर्थव्यवस्थाएं चीन से से व्यापार के मामले में अब तक का सबसे बड़ा झटका झेल रही हैं। चीन की ओर से कारों और चिप्स की खरीद में कटौती के बाद जापान ने जुलाई में बीते दो साल से अधिक समय में निर्यात में पहली गिरावट दर्ज की।
दक्षिण कोरिया और थाईलैंड के केंद्रीय बैंकरों ने पिछले सप्ताह चीन की कमजोर रिकवरी का हवाला देते हुए कहा था कि उनकी वृद्धि दर के अनुमान में गिरावट आई है। हालांकि, यह स्थिति सिर्फ खराब है ऐसा नहीं है। चीन की मंदी से वैश्विक तेल की कीमतों में नरमी आएगी। इससे उत्पादों की कीमतें गिरेंगी। इससे दुनिया भर में भेजे जाने वाले सामान भी सस्ता होंगे। यह अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के लिए एक लाभ की स्थिति होगी जो अब भी उच्च मुद्रास्फीति की मार से जूझ रहे हैं। भारत जैसे कुछ उभरते बाजार भी विदेशी निवेश को आकर्षित करने की उम्मीद में अवसर तलाश रहे हैं। उन्हें ऐसी कंपनियों से उम्मीद है जो चीन का विकल्प तलाश रहे हैं। हालांकि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में, चीन में लंबे समय तक मंदी दुनिया के बाकी हिस्सों की मदद करने के बजाय नुकसान पहुंचाएगी।
कई देश, विशेष रूप से एशिया में इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, भोजन, धातुओं और ऊर्जा तक हर चीज के लिए चीन को अपने सबसे बड़े निर्यात बाजार के रूप में गिनते हैं। चीनी आयात का मूल्य पिछले 10 महीनों में से नौ महीने में गिर गया है क्योंकि मांग महामारी के दौरान निर्धारित रिकॉर्ड ऊंचाई से कम हो गई है। अफ्रीका, एशिया और उत्तरी अमेरिका से शिपमेंट में एक साल पहले की तुलना में जुलाई में कमी दर्ज की गई। अफ्रीका और एशिया सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, इस साल के पहले सात महीनों में आयात का मूल्य 14% से अधिक कम हो गया है। इसका एक हिस्सा दक्षिण कोरिया और ताइवान से इलेक्ट्रॉनिक्स पार्ट्स की मांग में गिरावट के कारण है, जबकि जीवाश्म ईंधन जैसी वस्तुओं की गिरती कीमतें भी चीन में भेजे गए सामानों के मूल्य को प्रभावित कर रही हैं।
अब तक, चीन को भेजी जाने वाली लौह या तांबा अयस्क जैसी वस्तुओं की वास्तविक मात्रा पहले के समान बनी हुई है। लेकिन अगर मंदी जारी रहती है, तो शिपमेंट प्रभावित हो सकता है, जो ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका और दुनिया भर में जहां खनन का काम होता है, उन्हें प्रभावित करेगा। चीन में उत्पादों की कीमतें पिछले 10 महीनों में सिकुड़ गई हैं, जिसका अर्थ है कि देश से भेजे जाने वाले माल की लागत कम हो गई है। यह दुनिया भर के लोगों के लिए स्वागत योग्य खबर है जो अभी भी उच्च मुद्रास्फीति से जूझ रहे हैं। अमेरिकी डॉक पर चीनी सामानों की कीमत में इस साल हर महीने गिरावट दर्ज की गई और ऐसा तब तक जारी रहने की संभावना है जब तक कि चीन में कारखानों की लागत सकारात्मक क्षेत्र में वापस नहीं आ जातीं।
वेल्स फार्गो एंड कंपनी के अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि चीन में 'हार्ड लैंडिंग' - जिसे वे अपनी प्रवृत्ति वृद्धि से 12.5% विचलन के रूप में परिभाषित करते हैं - 2025 में अमेरिकी उपभोक्ता मुद्रास्फीति के लिए बेसलाइन पूर्वानुमान को 0.7 प्रतिशत अंक से घटाकर 1.4% कर देगा। चीनी उपभोक्ता वस्तुओं की तुलना में यात्रा और पर्यटन जैसी सेवाओं पर अधिक खर्च करते हैं- लेकिन वे अभी तक बड़ी संख्या में विदेशों में नहीं जा रहे हैं। हाल तक सरकार ने कई देशों में समूह पर्यटन पर प्रतिबंध लगा कर रखा था और अभी भी उड़ानों की संख्या में कमी है, इसका मतलब है कि महामारी से पहले की तुलना में यात्रा करना अब भी बहुत अधिक महंगा है।
महामारी और कमजोर अर्थव्यवस्था ने चीन में आय पर अंकुश लगा दिया है, जबकि वर्षों से आवास बाजार में मंदी का मतलब है कि घर के मालिक पहले की तुलना में कम अमीर महसूस करते हैं। इससे पता चलता है कि विदेशी यात्रा को महामारी से पहले के स्तर पर लौटने में लंबा समय लग सकता है, जिससे थाईलैंड जैसे दक्षिण पूर्व एशिया में पर्यटन पर निर्भर देश प्रभावित हो सकते हैं।
चीन के आर्थिक संकट ने इस साल डॉलर के मुकाबले स्थानीय मुद्रा को 5% से अधिक नीचे धकेल दिया है, युआन इस महीने 7.3 अंक को पार करने के करीब है। केंद्रीय बैंक ने अपने दैनिक मुद्रा फिक्सिंग सहित विभिन्न उपायों के माध्यम से युआन की अपनी रक्षा को बढ़ा दिया है। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों से पता चलता है कि अपतटीय युआन में मूल्यह्रास एशिया, लैटिन अमेरिका और मध्य और पूर्वी यूरोप ब्लॉक में अपने समकक्षों पर अधिक प्रभाव डाल रहा है, कुछ अन्य लोगों के साथ चीनी मुद्रा का सहसंबंध बढ़ रहा है। बार्कलेज बैंक पीएलसी के अनुसार, कमजोर धारणा का असर सिंगापुर डॉलर, थाई बाट और मैक्सिकन पेसो जैसी मुद्राओं पर पड़ सकता है।
पीजीआईएम लिमिटेड में इमर्जिंग मार्केट मैक्रो रिसर्च के प्रमुख मैग्डालेना पोलन ने कहा, "कमजोर चीनी अर्थव्यवस्था के साथ एशियाई अर्थव्यवस्थाओं और मुद्राओं पर आशावादी होना बहुत मुश्किल है और हम धातु आधारित मुद्राओं के बारे में अधिक चिंतित हैं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, जो अक्सर चीन के लिए प्रॉक्सी के रूप में कारोबार करता है, इस तिमाही में 3% से अधिक गिर गया है, जो ग्रुप-ऑफ-10 बास्केट में सबसे खराब प्रदर्शन करता दिखा है।
इस साल चीन की ब्याज दर में कटौती ने विदेशी निवेशकों के लिए अपने बॉन्ड की अपील को कम कर दिया है, जिन्होंने बाजार में अपना निवेश कम कर दिया है और शेष क्षेत्र में विकल्प की तलाश कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग की गणना के अनुसार, चीनी संप्रभु नोटों की विदेशी होल्डिंग 2019 के बाद से सबसे कम है। वैश्विक फंड दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया के स्थानीय मुद्रा बॉन्ड पर अधिक आशावादी हो गए थे क्योंकि केंद्रीय बैंक अपने ब्याज दर वृद्धि चक्र के अंत के करीब थे।
नाइकी से लेकर कैटरपिलर तक की कंपनियों ने चीन की मंदी से अपनी कमाई को प्रभावित होने की सूचना दी है। चीन में सबसे ज्यादा निवेश करने वाली वैश्विक कंपनियों पर नजर रखने वाला एमएससीआई सूचकांक इस महीने 9.3% पीछे चला गया है, जो वैश्विक शेयरों के व्यापक गेज में गिरावट से लगभग दोगुना है। हांगकांग में सैक्सो कैपिटल मार्केट्स के बाजार रणनीतिकार रेडमंड वोंग ने कहा, "लुई विटन बैग बनाने वाली कंपनी एलवीएमएच, गूची मालिक केरिंग एसए और हर्मेस इंटरनेशनल जैसी लक्जरी सामान कंपनियां विशेष रूप से चीनी मांग में किसी भी लड़खड़ाहट के प्रति संवेदनशील बनी हुई है।"