रक्षा मंत्री ने किया धन्यवाद
बजट के बाद रक्षा मंत्री ने कहा कि जहां तक रक्षा मंत्रालय को आवंटन का सवाल है, मैं वित्त मंत्री को 6,21,940.85 करोड़ रुपये का आवंटन देने के लिए धन्यवाद देता हूं, जो वित्त वर्ष 2024-25 के लिए भारत सरकार के कुल बजट का 12.9 फीसदी है। 1,72,000 करोड़ रुपये का पूंजीगत परिव्यय सशस्त्र बलों की क्षमताओं को और मजबूत करेगा। घरेलू पूंजीगत खरीद के लिए 1,05,518.43 करोड़ रुपये का प्रावधान आत्मनिर्भरता को और बढ़ावा देगा। मुझे खुशी है कि सीमा सड़कों (बीआरओ) को पूंजीगत मद में पिछले बजट की तुलना में आवंटन में 30 फीसदी की वृद्धि दी गई है। बीआरओ को 6,500 करोड़ रुपये का यह आवंटन हमारे सीमावर्ती बुनियादी ढांचे को और गति देगा।
रक्षा पेंशन बजट बढ़ाया
रक्षा मंत्रालय का कहना है कि 2024-25 के केंद्रीय बजट में रक्षा मंत्रालय को 6.22 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो सभी मंत्रालयों में सबसे ज्यादा है। वहीं यह आवंटन वित्त वर्ष 2023-24 से 4.79 फीसदी अधिक है। कैपिटल एक्वीजिशन के लिए 1.72 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए है। वहीं 92,088 करोड़ रुपये जीविका और ऑपरेशन रेडिनेस के लिए जारी किए गए हैं। रक्षा पेंशन बजट बढ़ाकर 1.41 लाख करोड़ रुपये किया गया है। 6,968 करोड़ रुपये ईसीएचएस के लिए, सीमा सड़कों के विकास के लिए 6,500 करोड़ रुपये, तटीय सुरक्षा के लिए 7,651 करोड़ रुपये, इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए वित्त वर्ष 2023-24 में iDEX के लिए बजटीय आवंटन 115 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 518 करोड़ रुपये किया गया है।
सेना के आधुनिकीकरण पर जोर
सेनाओं के आधुनिकीकरण की बात करें, तो वित्त वर्ष 2024-25 के लिए रक्षा बलों को कैपिटल एक्सपेंडिचर में बजटीय आवंटन 1.72 लाख करोड़ रुपये है, जो वित्त वर्ष 2022-23 से 20.33 फीसदी ज्यादा है और वित्त वर्ष 2023-24 के संशोधित आवंटन से 9.40 फीसदी अधिक है। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि बढ़े हुए बजटीय आवंटन से सशस्त्र बलों को अत्याधुनिक तकनीक, घातक हथियार, लड़ाकू विमान, जहाज, पनडुब्बियां, प्लेटफार्म, मानव रहित हवाई वाहनों, ड्रोन, स्पेशलाइज वाहन आदि से लैस करने में मदद मिलेगी।
सैन्य आधुनिकीकरण के लिए 1.7 लाख करोड़ रुपये के कैपिटल एक्सपेंडिचर में पिछले साल के बजटीय अनुमानों की तुलना में 5.8 फीसदी और संशोधित अनुमानों की तुलना में 9.4 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 14 लाख से ज़्यादा सशस्त्र बलों और डिफेंस सिविलियंस के वेतन और रोजमर्रा की ऑपरेशनल लागत के लिए 2.8 लाख करोड़ रुपये के रेवेन्यू एक्सपेंडिचर के सामने कैपिटल एक्सपेंडिचर बेहद कम साबित हुआ है। वहीं इसमें से 92,088 करोड़ रुपये ऑपरेशनल रेडिनेस के लिए हैं।
सेलरी-पेंशन पर इतना खर्च
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अगर 32 लाख भूतपूर्व सैनिकों और सेवानिवृत्त डिफेंस सिविलियंस के लिए 1.4 लाख करोड़ रुपये का डिफेंस पेंशन आवंटन को देखा जाए, तो यह कुल रक्षा आवंटन 2024-25 के लिए अनुमानित जीडीपी का सिर्फ 1.9 फीसदी ही बैठता है। वहीं अगर पेंशन बिल को छोड़ दिया जाए, तो यह 1.5 फीसदी से भी कम रह जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन और पाकिस्तान से खतरे से निपटने के लिए कम से कम 2.5 फीसदी की जरूरत है।
तिब्बत बॉर्डर पर बढ़ेगी निर्माण कार्यों की रफ्तार
वहीं, बजट में चीन के साथ गतिरोध के देखते हुए 3,488 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लगातार निगरानी रखने के लिए सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को पिछले बजट की तुलना में इस साल के बजट आवंटन में 30 फीसदी की वृद्धि की गई है। सूत्रों का कहना है कि यह बड़ा संकेत है कि चीन सीमा पर बुनियादी ढांचे पर कोई कमी नहीं आने वाली है। वहीं लद्दाख, अरुणाचल, सिक्किम आदि में एलएसी के पास सड़कों, कनेक्टिविटी का काम पूरी रफ्तार से जारी रहेगा। बीआरओ को यह बजट मिलने से लद्दाख में 13,700 फीट की ऊंचाई पर न्योमा एयरफील्ड का डेवलेपमेंट, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में स्थायी पुल संपर्क, हिमाचल प्रदेश में 4.1 किलोमीटर की रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण शिंकुन ला टनल, अरुणाचल प्रदेश में नेचिपु टनल और कई अन्य परियोजनाओं के निर्माण कार्यों में तेजी आएगी।
चीन का रक्षा बजट 19.61 लाख करोड़ रुपये
अमेरिकी थिंक टैंक अमेरिकन इंटरप्राइज इंस्टीट्यूट ने इस साल अप्रैल में खुलासा किया था कि चीन का साल 2022 में असली डिफेंस बजट 710 अरब डॉलर का था। जबकि चीन ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि उसका रक्षा बजट 296 अरब डॉलर ही है। चीन ने साल 2024 के लिए अपने रक्षा बजट को 7.2 फीसदी बढ़ा दिया है। इसे अब 19.61 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। वहीं, भारत के रक्षा बजट की बात करें तो यह चीन से करीब 9 गुना कम है। चीन का यह डिफेंस बजट तब है, जब वह पहले ही आर्थिक मंदी से जूझ रहा है। 2024 के लिए चीन का डिफेंस एक्सपेंडिचर पांच साल में सबसे ज्यादा है। विशेषज्ञों का कहना है कि चीन अपने रक्षा बजट का सबसे ज्यादा हिस्सा नए उपकरण पर खर्च कर रहा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साल 2035 तक चीनी सेना को पूरी तरह से मॉर्डनाइज करने का लक्ष्य रखा है। वहीं चीनी सेना को 2027 तक वर्ल्ड-क्लास आर्मी बनाने का टारगेट भी सेट किया है।
चीनी डिप्लोमेट्स ने भारत के लिए कही थी ये बात
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के मुताबिक (SIPRI) की रक्षा खर्च पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में सबसे अधिक सैन्य खर्च वाले टॉप 10 देशों में 83.6 बिलियन डॉलर के खर्च के साथ भारत चौथे नंबर है। 2023 में भारत के रक्षा बजट में 69 करोड़ रुपए का इजाफा किया गया था। इससे पहले जून 2023 में चीनी सेना के डिप्लोमेट्स ने कहा था कि भारत चीन को चुनौती नहीं दे सकता है। क्योंकि भारत ने अपनी सेना का आधुनिकीकरण नहीं किया है। चीन का कहना था कि चीन की डिफेंस इंडस्ट्री और मैन्यूफैक्चरिंग के मुकाबले में भारत अभी काफी पीछे है और हमारे जितना बेहतर बनने में उन्हें कई दशक लग जाएंगे।