चीन ने सौर ऊर्जा और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के लिए नई दिल्ली की अपनाए जा रहे समर्थन उपायों को लेकर भारत के खिलाफ विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ तकनीकी उत्पादों के लिए भारत द्वारा निर्धारित टैरिफ या आयात शुल्क, और आयातित वस्तुओं के बजाय घरेलू वस्तुओं के उपयोग पर निर्भर उपाय, चीनी वस्तुओं के साथ भेदभाव करते हैं। बीजिंग इन क्षेत्रों के अंतर्गत वस्तुओं का एक प्रमुख निर्यातक है। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के एक संचार के अनुसार, चीन ने डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान नियमों के तहत भारत के साथ बातचीत करने की मांग की है।
चीन ने दावा किया है कि भारत की ओर से किए गए ये उपाय और प्रोत्साहन विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के टैरिफ और व्यापार से जुड़े समझौते से संबंधित नियमों का उल्लंघन करते हैं। चीन ने कहा है, "मेरे अधिकारियों ने मुझे भारत सरकार के साथ परामर्श करने का निर्देश दिया है... भारत द्वारा कुछ प्रौद्योगिकी उत्पादों को दिए जाने वाले टैरिफ व्यवहार और भारत द्वारा अपनाए गए कुछ उपायों के संबंध में, जो आयातित वस्तुओं के बजाय घरेलू वस्तुओं के उपयोग पर निर्भर हैं या जो अन्यथा चीनी मूल की वस्तुओं के साथ भेदभाव करते हैं।" चीन ने आरोप लगाया है कि भारत के उपायों से सोलर सेल, सोलर मॉड्यूल और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्रों में वस्तुओं के व्यापार पर असर पड़ता है।
इसने उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन योजना: उच्च दक्षता वाले सौर पीवी मॉड्यूल पर राष्ट्रीय कार्यक्रम के तहत प्रोत्साहन के लिए पात्रता और वितरण को नियंत्रित करने वाली शर्तों पर सवाल उठाए हैं। इसमें कहा गया है कि सोलर मॉड्यूल कार्यक्रम के तहत दिए जाने वाले प्रोत्साहन कई मानदंडों पर आधारित हैं, जिनमें निर्धारित न्यूनतम स्थानीय मूल्यवर्धन की आवश्यकता भी शामिल है।
भारत ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयातित वस्तुओं पर निर्भरता कम करने के लिए ये उपाय किए हैं। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों के अनुसार, विवाद निपटान प्रक्रिया का पहला चरण परामर्श लेना है। यदि भारत के साथ अनुरोधित परामर्श से कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकलता है, तो यूरोपीय संघ डब्ल्यूटीओ से इस मामले में एक पैनल गठित करने का अनुरोध कर सकता है ताकि उठाए गए मुद्दे पर निर्णय लिया जा सके।
चीन भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। पिछले वित्तीय वर्ष में, भारत का चीन को निर्यात 14.5 प्रतिशत घटकर 14.25 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया, जबकि 2023-24 में यह 16.66 अरब अमेरिकी डॉलर था। हालांकि, आयात 11.52 प्रतिशत बढ़कर 101.73 अरब अमेरिकी डॉलर से 113.45 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा 2024-25 के दौरान बढ़कर 99.2 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया।