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बिजली: मांग बढ़ने से पहले सरकार का बड़ा फैसला, 112 कैप्टिव कोयला प्लांटों को पूरी क्षमता से चलाने का आदेश

Sat, 26 Sep 2026 05:45 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

बढ़ती बिजली मांग के बीच केंद्र सरकार ने 112 कैप्टिव कोयला प्लांटों को 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर तक पूरी उपलब्ध क्षमता पर चलाने का आदेश दिया है। जानिए किन कंपनियों के प्लांट शामिल हैं और इसका बिजली बाजार पर क्या असर होगा।
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विद्युत मंत्रालय - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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देश में आने वाले महीनों में बिजली की मांग बढ़ने की उम्मीद के बीच केंद्र सरकार ने 112 कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अपनी उपलब्ध अधिकतम क्षमता पर चलाने का निर्देश दिया है। ये निर्देश 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेंगे। सरकार का मकसद बिजली उत्पादन की उपलब्ध क्षमता का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल कर ग्रिड में पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना है।

सरकार ने 112 कैप्टिव पावर प्लांट को क्या निर्देश दिया है?

विद्युत मंत्रालय ने 25 सितंबर को जारी आदेश में 50 मेगावाट या उससे अधिक क्षमता वाले कैप्टिव कोयला आधारित बिजली संयंत्रों को अपनी उपलब्ध क्षमता के अधिकतम स्तर पर बिजली उत्पादन करने को कहा है। यह निर्देश बिजली अधिनियम, 2003 की धारा 11 के तहत जारी किया गया है।

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कैप्टिव पावर प्लांट ऐसे बिजली संयंत्र होते हैं जिन्हें मुख्य रूप से किसी कंपनी या औद्योगिक इकाई की अपनी बिजली जरूरत पूरी करने के लिए लगाया जाता है।

सरकार को अभी यह कदम क्यों उठाना पड़ा?

विद्युत मंत्रालय के मुताबिक मौजूदा समय में बिजली की मांग और आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए आने वाले महीनों में मांग बढ़ने की उम्मीद है। ऐसे में सरकार बिजली की उपलब्धता बढ़ाने के लिए कई कदम उठा रही है।

मंत्रालय का कहना है कि बिजली उत्पादन के सभी स्रोतों की उपलब्ध क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल करना जरूरी है। कैप्टिव प्लांट भी इसी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

अपनी जरूरत से ज्यादा बिजली का क्या होगा?

कैप्टिव प्लांटों को अपनी औद्योगिक जरूरत पूरी करने के बाद बची हुई बिजली को पावर एक्सचेंजों के जरिए बेचने के लिए उपलब्ध कराना होगा। यह बिक्री लागू बाजार नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार होगी।

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इसका मतलब यह है कि इन संयंत्रों से पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली केवल संबंधित कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जरूरत के मुताबिक बिजली बाजार में भी उपलब्ध हो सकेगी।

किन बड़ी कंपनियों के प्लांट इस आदेश में शामिल हैं?

विद्युत मंत्रालय के आदेश के साथ जारी सूची में 112 कैप्टिव जनरेशन इकाइयां शामिल हैं। इनमें देश के कई बड़े औद्योगिक समूहों और कंपनियों से जुड़े बिजली संयंत्र हैं। सूची में टाटा स्टील, वेदांता, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, JSW स्टील, अल्ट्राटेक सीमेंट, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और NALCO जैसी कंपनियों की इकाइयां शामिल हैं।

इन प्लांटों का संबंध स्टील, एल्युमीनियम, सीमेंट, पेट्रोलियम, उर्वरक, पेपर और केमिकल जैसे कई प्रमुख उद्योगों से है।

क्या कंपनियों को कोयले का पर्याप्त स्टॉक भी रखना होगा?

हां। सरकार ने इन बिजली संयंत्रों को पर्याप्त कोयला स्टॉक बनाए रखने का भी निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईंधन की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित न हो और अक्टूबर से दिसंबर के दौरान प्लांट अपनी अधिकतम उपलब्ध क्षमता पर काम कर सकें।

सरकार इन प्लांटों की निगरानी कैसे करेगी?

इन कंपनियों को हर सप्ताह केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) को रिपोर्ट देनी होगी। रिपोर्ट में बिजली उत्पादन, कैप्टिव खपत, पावर एक्सचेंज या अन्य अनुमत माध्यमों से बेची गई बिजली, उपलब्ध उत्पादन क्षमता और कोयला स्टॉक की जानकारी देनी होगी।

इसका बिजली बाजार पर क्या असर पड़ सकता है?

सरकार के इस कदम से अगले तीन महीनों में कैप्टिव बिजली उत्पादन की उपलब्धता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। अपनी जरूरत से अतिरिक्त बिजली बाजार में आने पर ग्रिड में उपलब्ध बिजली की मात्रा बढ़ सकती है। हालांकि इसका वास्तविक प्रभाव बिजली की मांग, प्लांटों की उपलब्ध क्षमता और कोयले की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

सरकार ने बढ़ती बिजली मांग की संभावित चुनौती से निपटने के लिए कैप्टिव कोयला बिजली संयंत्रों की क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल करने का फैसला किया है। 1 अक्तूबर से 31 दिसंबर तक 112 प्लांटों पर लागू यह आदेश उत्पादन, कोयला स्टॉक और अतिरिक्त बिजली की बिक्री- तीनों पर निगरानी बढ़ाएगा।

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