शुक्रवार को धन की देवी लक्ष्मी का दिन मानना कुछ ठीक साबित करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने अर्थव्यवस्था में तरलता के उद्देश्य से उत्साह बढ़ाने वाली घोषणा कर दी है। इससे बड़े कार्पोरेट घराने से लेकर बैंकों और देश के उद्योगों को काफी फायदा होगा। सुस्त पड़ी आर्थिक चाल में गति आएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रिजर्व बैंक की घोषणा का स्वागत किया है। उन्होंने कहा है कि इससे तरलता आएगी। सीआईआई (नार्थ इंडिया) के चेयरमैन दिनेश दुआ ने भी कहा कि केंद्रीय बैंक ने अपना काम कर दिया है। माइक्रोइकोनामिक्स की समझ रखने वाले डीके पंत भी इसे अच्छा मानते हैं।
रिजर्व बैंक के एक वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि यह निर्णय बहुत विचार-विमर्श के बाद लिया गया है। इससे देश के लघु, सूक्ष्म, मझोले और बड़े उद्योगों को फायदा होगा। राज्यों को केविड-19 संक्रमण से निबटने में मदद मिलेगी और मध्य वर्ग को भी इससे राहत मिलेगी।
सूत्र का कहना है कि रिजर्व बैंक के गवर्नर ने नकदी को लेकर आश्वासन दिया है और भारत के आर्थिक फंडामेंटल काफी मजबूत हैं। इसलिए कुछ समय के बाद देश में मांग भी बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था में तेजी भी आएगी।
भारत की 1.99 फीसदी के करीब आंकी जा रही जीडीपी ग्रोथ में भी जबरदस्त सुधार होगा। सूत्रों का मानना है कि अगले दो-तीन महीने बाद सब कुछ पटरी पर आता दिखेगा।
कॉर्पोरेट जगत की निगाह केंद्र सरकार के स्टिमुलस पैकेज पर है। दिनेश दुआ कहते हैं कि किसी प्रभावी पैकेज के ऐलान किए बिना काम चलने वाला नहीं है। चाहे बड़ा उद्योग हो या छोटा दशा सबकी खराब है। एसएमई के पास अपने कर्मचारियों को देने के लिए अगले महीने से न तो तनख्वाह है, न ही बिजली, पानी के बिल, रोजमर्रा का खर्चा संभालने की स्थिति।
इसलिए लॉकडाउन से छूट मिलने के बाद भी अभी ये उत्पादन की स्थिति में मुश्किल से आएंगी। बताते हैं, कई अच्छी दवा कंपनियों की स्थिति काफी खराब है। एविएशन, होटल, पर्यटन या हास्पिटैलिटी से जुड़ी कंपनियों के बारे में कुछ कहना ही बेकार है।
वह न जाने कब अपने पैर पर खड़ी हो पाएंगी। एसएमई फेडरेशन के अनिल भारद्वाज का भी कहना है कि बिना सरकार की मदद के यह क्षेत्र खड़ा नहीं हो सकता। इसलिए केंद्र सरकार को आगे आना होगा।
दूसरी बड़ी समस्या गरीबों, मजदूरों, गांव और दूर-दराज के लोगों की भी है। सरकार ने कृषि क्षेत्र को खोल दिया है, लेकिन अन्य का कामधंधा चौपट होने से इन्हें भी रोटी, राहत चाहिए। ग्रामीण विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने भी माना कि देश इस समय विशेष स्थिति से गुजर रहा है। इसलिए सरकार उचित कदम उठाने पर विचार कर रही है।
विपक्ष के नेता और राज्य के मुख्यमंत्री भी केंद्र सरकार से राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, महासचिव और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, राजस्थान के अशोक गहलोत समेत अन्य ने केन्द्र सरकार से अपनी मुट्ठी खोलने की अपील की है।
राहुल गांधी ने इसे न्याय योजना मानते हुए प्रधानमंत्री से मांग की है कि उन्हें गरीब, मजदूर, किसान, लघु, छोटे, मझोले उद्योगों, के लिए राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए ताकि देश में बेरोजगारी की भयावह तस्वीर से बचा जा सके।
गरीबों के खाते में सब्सिडी का दिया जाने वाला पैसा भेजा जाना चाहिए। अग्रिम भुगतान करना चाहिए। मनरेगा को संजीवनी देनी चाहिए और राज्यों को संसाधन तथा जीएसटी का बकाया दिया जाना चाहिए।
विपक्ष के नेताओं का मानना है कि जब तक सरकार देश के गांवों, विभिन्न क्षेत्रों में पैसा नहीं डालेगी, तबतक न तो लोगों को राहत मिल सकती है और न ही अर्थव्यवस्था के लिए संभावित बड़े झटके को कम किया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी एसएमई क्षेत्र के दबाव को महसूस कर रहे हैं। वह भूतल परिवहन मंत्री भी हैं। परिवहन व्यवस्था भी ठप है और यह लोगों के रोजगार का बड़ा जरिया है। इस पर चर्चा करने वाले सूत्र बताते हैं कि गडकरी के चेहरे का तनाव साफ देखा जा सकता है।
यही स्थिति रेल मंत्रालय, सिविल एविएशन की है। पर्यटन विभाग के वरिष्ठ सूत्र का कहना है कि चाहे होटल इंडस्ट्री हो या पर्यटन से जुड़ी एजेंसियां, सभी अब सितंबर, अक्टूबर के बाद ही अपने क्षेत्र में कामकाज की संभावना बता पा रही हैं।
नीति आयोग के एक सदस्य का कहना है कि बड़ी मात्रा में मंत्रालयों के सुझाव आ रहे हैं। विभिन्न मोर्चे पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय स्थितियों को समझ रहा है। केंद्र सरकार कुछ विशेष योजना बना रही है। इसकी कभी भी घोषणा हो सकती है। सूत्र का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण के फैलाव को रोकने में सरकार अभी तक सही रास्ते पर है। आगे भी सब ठीक रहेगा।