चीन के प्रमुख धातुओं के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध से भारत सहित कई देशों में ऑटोमोबाइल और सेमीकंडक्टर चिप के विनिर्माण में व्यापक व्यवधान उत्पन्न हो गया है। दुर्लभ खनिजों में नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन शामिल हैं। इनका इस्तेमाल उच्च प्रदर्शन वाले मोटर वाहन में किया जाता है।
चीन पर निर्भरता घटाने और देश में ही दुर्लभ खनिजों का उत्पादन बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 1,345 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन (सब्सिडी) देने की योजना बनाई है। यह योजना दुर्लभ खनिज ऑक्साइड को चुंबक में बदलने के लिए हर स्तर पर सहायता प्रदान करेगी।
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प्रस्तावित योजना वैश्विक आपूर्ति पर निर्भरता घटाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जो चीन के दुर्लभ खनिज (चुंबक) के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बाद आई है। चीन के प्रतिबंध से न सिर्फ वैश्विक आपूर्ति प्रभावित हुई है, बल्कि भारत सहित दुनियाभर की इलेक्ट्रिक वाहन कंपनियों की परेशानी बढ़ गई है।
केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने शुक्रवार को कहा, दुर्लभ खनिजों के उत्पादन पर प्रोत्साहन देने के लिए 1,345 करोड़ रुपये की योजना पर अंतर-मंत्रालयी विचार-विमर्श जारी है। इसके बाद प्रस्ताव को मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के पास भेजा जाएगा। वहीं, भारी उद्योग मंत्रालय में सचिव कामरान रिजवी ने बताया, हमें चुंबकों में रुचि है। कोई भी हमें चुंबक देगा, उसे प्रोत्साहन मिलेगा। यह योजना पहली रूपरेखा है, जिसे अंतर-मंत्रालयी परामर्श के लिए भेजा है।
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दो कंपनियों को मिलेगी सब्सिडी
योजना के तहत दो चुनिंदा विनिर्माताओं को प्रोत्साहन दिया जाएगा। यह सब्सिडी कंपनियों को दुर्लभ खनिज ऑक्साइड को चुंबकों में बदलने के लिए प्रसंस्करण सुविधाएं स्थापित करने में मदद करेगी। साथ ही, परमाणु ऊर्जा मंत्रालय के तहत काम करने वाली सार्वजनिक उपक्रम इंडियन रेयर अर्थ मैग्नेट्स लि. के साथ मिलकर स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देगी।
प्रतिबंध से वाहन और चिप विनिर्माण पर असर
चीन के प्रमुख धातुओं के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंध से भारत सहित कई देशों में ऑटोमोबाइल और सेमीकंडक्टर चिप के विनिर्माण में व्यापक व्यवधान उत्पन्न हो गया है। दुर्लभ खनिजों में नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन शामिल हैं। इनका इस्तेमाल उच्च प्रदर्शन वाले मोटर वाहन में किया जाता है। इलेक्ट्रिक गाड़ियों (दोपहिया व यात्री वाहनों) में ट्रैक्शन मोटर्स के साथ ई-वाहनों और पेट्रोल-डीजल इंजन वाहनों में पावर स्टीयरिंग मोटर्स (यात्री वाहनों में) में इनका इस्तेमाल होता है।