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बड़ा कदम: कंपनियों से जुड़े निधि नियमों में बदलाव, केंद्र सरकार ने आम लोगों के हित में बताया

Wed, 20 Apr 2022 06:33 PM IST
दीपक चतुर्वेदी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि आम जनता के हितों की रक्षा के लिए यह बेहद जरूरी है कि इसका सदस्य बनने से पहले केंद्र सरकार से निधि कंपनी के रूप में घोषणा हासिल की जाए।
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विस्तार
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सरकार ने बुधवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए कंपनियों से जुड़े निधि नियमों में बड़े बदलाव किए हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि ये संशोधन देश के आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए किए गए हैं। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय इस संबंध में कहा है कि निधियों के रूप में कार्य करने की इच्छुक सूचीबद्ध कंपनियों को अब जमा स्वीकार करने से पहले केंद्र सरकार से पूर्व-मंजूरी प्राप्त करनी होगी।

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मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया कि आम जनता के हितों की रक्षा के लिए यह बेहद जरूरी है कि इसका सदस्य बनने से पहले केंद्र सरकार से निधि कंपनी के रूप में घोषणा हासिल की जाए। इसमें आगे बताया गया कि इसके अलावा दस लाख रुपये की शेयर पूंजी के साथ निधि कंपनी के रूप में गठित फर्म को खुद को निधि घोषित करने के लिए न्यूनतम 200 की सदस्यता के साथ एनडीएच-4 फॉर्म के जरिए आवेदन करना आवश्यक होगा। ऐसी कंपनियों का शुद्ध स्वामित्व वाला कोष (एनओएफ) गठन के 120 दिन के अंदर 20 लाख रुपये होना चाहिए।

कंपनी कानून 1956 के तहत एक निधि या म्यूचुअल बेनेफिट सोसायटी का अर्थ ऐसी कंपनी से है जिसे केंद्र सरकार विज्ञप्ति जारी कर आधिकारिक गजट में निधि या म्यूचुअल बेनेफिट सोसाइटी के रूप में घोषित किया हो। नए नियमों में कंपनी के प्रवर्तकों और निदेशकों को नियमों में निर्धारित उपयुक्त व्यक्ति के मानदंड को पूरा करना होगा। मंत्रालय ने बताया कि समय पर निपटान के लिए केंद्र सरकार एनडीएच-4 के रूप में कंपनियों की तरफ से दायर आवेदनों की प्राप्ति के 45 दिन के भीतर कोई निर्णय नहीं लेती है, तो मंजूरी को स्वीकृत माना जाएगा।

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