ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ओएनजीसी) ने इस वर्ष की दूसरी तिमाही में किसी भी अन्य भारतीय कंपनी की तुलना में सर्वाधिक 18,347 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया है। इस तरह यह कंपनी देश की सबसे कमाऊ कंपनी कही जा सकती है। लेकिन इसके बाद भी सरकार ने इसके विनिवेश का निर्णय लिया है। केंद्र सरकार ने 28 अक्तूबर को एक पत्र के जरिए ओएनजीसी को मुंबई हाई और बेसिन क्षेत्र के कुल उत्पादन में 60 फीसदी हिस्सेदारी निजी कंपनियों को देने को कहा था। इससे कंपनी के कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। वे सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की अपील कर रहे हैं।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी को लिखे पत्र में ओएनजीसी के 17,000 कर्मचारियों के एक संगठन ने कहा है कि कंपनी बेहद अच्छी आर्थिक स्थिति में है, उसे निजी क्षेत्र के हाथों में नहीं सौंपा जाना चाहिए। इससे कंपनी के कर्मचारियों के साथ-साथ देश के रणनीतिक महत्व के ऊर्जा हितों को गंभीर चोट पहुंच सकती है। संगठन के नेता और मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव रहे अमर नाथ ने इसे सरकार की बड़ी गलती बताया है।
ओएनजीसी ने अपनी वित्तीय स्थिति के बारे में बीएसई को जानकारी दी है कि इस वर्ष की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) में कंपनी ने 22682.48 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था, जो पिछले वर्ष की समान अवधि (लेकिन कोरोना काल) में 3254.35 करोड़ रुपये रहा था। जुलाई-सितंबर की तिमाही में कंपनी ने 18,347.73 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया। इसके पिछले वर्ष में इसी अवधि के दौरान कंपनी ने 2757.77 करोड़ रुपये का लाभ कमाया था। कंपनी ने पिछले वित्तवर्ष के दौरान 11246.44 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था।
वहीं, आर्थिक मामलों के जानकार भाजपा के एक राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि यह एक बड़ा विवादित प्रश्न है कि सरकार को तेल-गैस सहित किसी भी वस्तु के व्यापार में होना चाहिए, या नहीं। उन्होंने कहा कि जब देश आजाद हुआ था, देश का निजी क्षेत्र अपेक्षाकृत कमजोर था। वह बड़े क्षेत्रों में पैसा लगाने की स्थिति में नहीं था क्योंकि ये क्षेत्र बहुत बड़ी पूंजी की मांग करते हैं जिसे उपलब्ध कराने में बड़े से बड़ा उद्योगपति सक्षम नहीं था। इसीलिए सरकार ने तत्काल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अनेक क्षेत्रों में निवेश किया। कहीं अकेले, कहीं निगमों के जरिए और कहीं सहकारी माध्यम से उद्योगों को बढ़ाया गया। यह उस समय की आवश्यकता थी।