जेट एयरवेज के संकट का असर हवाई यात्रियों पर पड़ते देख सरकार को आखिरकार उसे बचाने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। सरकार ने विमानन कंपनी को कर्ज देने वाले बैंकों से दिवालिया प्रक्रिया बंद कर उसे बचाने की प्रक्रिया शुरू करने की मंशा जताई है।
मामले से जुड़े एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि वित्त मंत्रालय इस स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए है। पिछले सप्ताह बैंकों ने जेट एयरवेज की वित्तीय स्थिति पर समीक्षा रिपोर्ट पेश कर सरकार से सुझाव मांगा था। सरकार ने जवाब में कहा है कि बैंक कर्ज की राशि को इक्विटी में बदलकर जेट एयरवेज में हिस्सेदारी ले सकते हैं।
हालांकि, ऐसा बहुत ही कम होता है लेकिन करदाताओं के पैसे से मुसीबत में फंसी विमानन कंपनी को दिवालिया प्रक्रिया से बचाना चाहिए। कंपनी की स्थिति में सुधार आने के बाद बैंक चाहें तो अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं। जेट एयवेज पर 8 हजार करोड़ से अधिक का कर्जा है और वह मार्च में ब्याज व किस्त भी नहीं चुका सकी है।
आईएटीए की सदस्य बनी स्पाइस जेट
घरेलू विमानन कंपनी स्पाइस जेट को अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात संगठन (आईएटीए) की सदस्यता मिल गई है। यह सदस्यता पाने वाली स्पाइस जेट देश की पहली किफायती हवाई सेवा कंपनी है। आईएटीए में अभी 290 एयरलाइन की सदस्यता है। इस कदम से स्पाइस जेट को वैश्विक विमानन बाजार में कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही कंपनी संगठन में शामिल एयरलाइंस की भी आसानी से मदद ले सकेगी।