देश में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही तय करने की दिशा में एक कड़ा रुख अपनाते हुए, केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने नियमों के उल्लंघन पर बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने अनधिकृत वॉकी-टॉकी की लिस्टिंग और बिक्री के लिए अमेजन, फ्लिपकार्ट, मेटा (फेसबुक मार्केटप्लेस) और मीशो सहित आठ संस्थाओं पर कुल 44 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और मौजूदा दूरसंचार कानूनों के उल्लंघन के आधार पर की गई है। सीसीपीए ने पाया कि इन प्लेटफॉर्म्स पर 16,970 से अधिक गैर-अनुपालन वाले उत्पादों को सूचीबद्ध किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, मीशो, मेटा, चिमिया, जियोमार्ट और टॉक प्रो ने अपने जुर्माने का भुगतान कर दिया है, जबकि शेष प्लेटफॉर्म्स से भुगतान का इंतजार है।
कंपनियों ने क्या गड़बड़ी की?
सीसीपीए की जांच में यह सामने आया कि ये प्लेटफॉर्म्स ऐसे पर्सनल मोबाइल रेडियो (PMR) की बिक्री की सुविधा दे रहे थे, जो लाइसेंस-मुक्त फ्रीक्वेंसी बैंड (446.0-446.2 MHz) के बाहर काम कर रहे थे। नियमों के अनुसार, ऐसे उपकरणों की बिक्री या संचालन से पहले 'उपकरण प्रकार अनुमोदन' (ETA) सर्टिफिकेशन लेना अनिवार्य है।
कंपनी के किस तर्क को सीसीपीए ने किया खारिज?
सुनवाई के दौरान कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने 'इंटरमीडियरी' (मध्यस्थ) होने का तर्क देते हुए तीसरे पक्ष की लिस्टिंग के लिए जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की। हालांकि, सीसीपीए ने इस बचाव को सिरे से खारिज कर दिया। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया कि जो प्लेटफॉर्म उत्पादों की लिस्टिंग, होस्टिंग और प्रमोशन की सुविधा देते हैं, उन्हें केवल 'पैसिव कंड्यूट' (मूक माध्यम) नहीं माना जा सकता। सुरक्षित और कानूनी उत्पादों की बिक्री सुनिश्चित करना इन प्लेटफॉर्म्स की अनिवार्य जिम्मेदारी है।
ये उत्पाद सुरक्षा के लिए खतरा कैसे?
सीसीपीए ने चेतावनी दी है कि अनधिकृत रेडियो संचार उपकरण राष्ट्रीय संचार नेटवर्क में हस्तक्षेप कर सकते हैं। इससे कानून प्रवर्तन एजेंसियों, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों और आपातकालीन सेवाओं के संचालन में बाधा आ सकती है, जो सीधे तौर पर सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
इस मामले में नई गाइडलाइंस क्या?
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, सीसीपीए ने 'रेडियो उपकरणों की अवैध लिस्टिंग और बिक्री की रोकथाम और विनियमन के लिए दिशा-निर्देश, 2025' अधिसूचित किए हैं। इनके तहत अब ई-कॉमर्स कंपनियों को-
इंडिया मार्ट और ट्रेड इंडिया सहित पांच अन्य संस्थाओं के खिलाफ जांच अभी भी जारी है। यह कार्रवाई ई-कॉमर्स क्षेत्र में संदेश है कि डिजिटल बाजार में विकास के साथ-साथ कानूनी जवाबदेही और उपभोक्ता सुरक्षा सर्वोपरि है।