कनाडा अगले सप्ताह भारत में अपना सबसे बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भेज रहा है। 30 साल से अधिक समय में यह उसका सबसे बड़ा व्यापारिक अभियान होगा। इसका उद्देश्य वाणिज्यिक संबंधों का विस्तार करना और 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करना है।
कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनविंदर सिद्धू इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। यह प्रतिनिधिमंडल 12 से 17 अक्तूबर तक मुंबई और बेंगलुरु का दौरा करेगा। एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। भारत और कनाडा इस साल के अंत तक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (सीईपीए) पर वार्ता पूरी करने में लगे हैं। सीईपीए वार्ता का पांचवां दौर 5 से 9 अक्तूबर तक ओटावा में हुआ था।
यह व्यापारिक अभियान क्यों महत्वपूर्ण है?
कनाडा भारत की बढ़ती मांग के साथ अपनी विशेषज्ञता का मिलान करना चाहता है। इसमें विमानन, कृषि-खाद्य और स्वच्छ प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र शामिल हैं। सिद्धू ने कहा कि इससे व्यापार में विविधता आएगी और नया निवेश आकर्षित होगा। यह अभियान दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण है। यह कनाडाई कारोबारियों को भारतीय निर्णय लेने वालों, उद्योग जगत के नेताओं और संभावित ग्राहकों से जोड़ेगा।
व्यापार समझौते पर क्या प्रगति हुई है?
सिद्धू ने 1 अक्तूबर को अमेरिका के मिल्वौकी में जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। दोनों मंत्रियों ने वार्ता में हुई प्रगति पर चर्चा की। उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को गहरा करने के प्रयासों पर भी बात की। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मार्च में भारत यात्रा के दौरान एक व्यापक व्यापार समझौते पर जोर दिया गया था। तब 2030 तक दोतरफा व्यापार को 70 अरब कैनेडियन डॉलर (करीब 4.75 लाख करोड़ रुपये) तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया था।
वर्तमान में भारत-कनाडा व्यापार की स्थिति क्या है और आगे क्या है?
कनाडाई सरकार के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार कुल 30.4 अरब कैनेडियन डॉलर रहा। 2025 में भारत को कनाडा का व्यापारिक निर्यात 3.9 अरब कैनेडियन डॉलर था। इसमें मुख्य रूप से सब्जियां, खनिज ईंधन और तेल, तथा लकड़ी का गूदा शामिल थे। भारत से कनाडा का व्यापारिक आयात 9.7 अरब कैनेडियन डॉलर रहा। इसमें मुख्य रूप से कीमती पत्थर और धातुएं, मशीनरी और फार्मा उत्पाद शामिल थे। कनाडा संयुक्त राज्य अमेरिका से परे अपने निर्यात में विविधता लाना चाहता है। भारत इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2022 में शुरू की गई कनाडाई हिंद-प्रशांत रणनीति व्यापार, सुरक्षा, स्थिरता, लोगों से लोगों के संबंध और क्षेत्रीय जुड़ाव को अपने पांच रणनीतिक उद्देश्यों के रूप में पहचानती है।