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Biz Updates: बैंकिंग हड़ताल से 4 लाख करोड़ रुपये के चेक क्लियरेंस में अटके; मैरिको को 460 करोड़ रुपये का फायदा

Wed, 28 Jan 2026 05:29 AM IST
पवन पांडेय बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बिजनेस अपडेट - फोटो : अमर उजाला
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यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) की हड़ताल के चलते देशभर में कई जगहों पर जमा और निकासी जैसी शाखा बैंकिंग सेवाएं प्रभावित रहीं। साथ ही, 4 लाख करोड़ रुपये के चेक क्लियरेंस में अटक गए। यूनियन की मांग सप्ताह में पांच कार्य दिवस को लागू करने की है। नौ यूनियनों के समूह यूएफबीयू की ओर से आयोजित यह हड़ताल 23 जनवरी को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई बैठक के विफल होने के बाद हुई।
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यूएफबीयू की हड़ताल में सरकारी बैंकों की विभिन्न यूनियनों के 8 लाख कर्मचारियों ने भाग लिया। ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉई एसोसिएशन के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने बताया, नकद लेनदेन प्रभावित हुए और बिल ट्रेडिंग, बिल डिस्काउंटिंग और ट्रेडिंग पर असर पड़ा। सरकारी बैंकों में कई जगहों पर ट्रेजरी संचालन भी बंद रहा। ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कन्फेडरेशन के महासचिव रूपम रॉय ने बताया, दिसंबर, 2023 में हुई चर्चाओं के बाद यह सहमति बनी थी कि सोमवार से शुक्रवार तक दैनिक कार्य समय में 40 मिनट की वृद्धि की जाएगी। शेष शनिवार को अवकाश घोषित किया जाएगा। 

एशियन पेंट्स का लाभ घटकर 1,128 करोड़
नए श्रम संहिता के लागू होने के चलते एशियन पेंट्स का मुनाफा दिसंबर तिमाही में 4 फीसदी घटकर 1,073.92 करोड़ रुपये रह गया है। राजस्व 3.71 फीसदी बढ़कर 8,867 करोड़ रुपये हो गया। 157.61 करोड़ ग्रेच्युटी में वृद्धि के लिए और 63.74 करोड़ के एकमुश्त खर्च व 93.87 करोड़ के व्हाइट टीक के अधिग्रहण जैसे खर्चों से लाभ में कमी आई। 

टाटा कंज्यूमर का फायदा 36 फीसदी बढ़ा
टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स को तीसरी तिमाही में 384.52 करोड़ का फायदा हुआ है। एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में 36.4 फीसदी अधिक है। राजस्व 15 फीसदी बढ़कर 5,112 करोड़ हो गया। खर्च 4,582.24 करोड़ रहा, जो 12.11 फीसदी अधिक है। अन्य आय सहित टाटा कंज्यूमर की आय 14 फीसदी से ज्यादा बढ़कर 5,145.01 करोड़ रही।

मैरिको को 460 करोड़ रुपये का फायदा
मैरिको लि. को दिसंबर तिमाही में 460 करोड़ रुपये का फायदा हुआ है। एक साल पहले की समान अवधि की तुलना में यह 13.3 फीसदी अधिक है। राजस्व 26.6 फीसदी बढ़कर 3,537 करोड़ रुपये हो गया। खर्च 29.8 फीसदी बढ़कर 3,009 करोड़ हो गया। 
 

ऊर्जा क्षेत्र में भारत को सालाना 145 अरब डॉलर निवेश जुटाने की जरूरत
सतत आर्थिक विकास और शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्यों के बीच के अंतर को पाटने के लिए भारत को ऊर्जा क्षेत्र में 145 अरब डॉलर का वार्षिक निवेश जुटाने की जरूरत होगी। वुड मैकेन्जी के एशिया प्रशांत क्षेत्र के उपाध्यक्ष जोशुआ न्गु ने इंडिया एनर्जी वीक में कहा, भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्यों का समर्थन करने के लिए पूंजी का उपयोग रणनीतिक रूप से बिजली उत्पादन, ऊर्जा भंडारण और ग्रिड के तत्काल आधुनिकीकरण पर केंद्रित होना चाहिए। जोशुआ न्गु ने कहा, भारत का अगला दशक निर्णायक है। भारत को तात्कालिक ऊर्जा सुरक्षा के जोखिम को कम करना होगा। साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए जरूरी कम कार्बन उत्सर्जन वाली संरचना का निर्माण करना होगा। निवेश विकल्प यह तय करेंगे कि देश कार्बन बुनियादी ढांचे में फंसा रहेगा या कम कार्बन उत्सर्जन वाले औद्योगीकरण में विश्व का नेतृत्व करेगा। मैकेंजी ने कहा, विद्युत क्षेत्र भारत में उत्सर्जन का बड़ा स्रोत होने के साथ ऊर्जा परिवर्तन का इंजन भी है। 
 
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2032 तक तीन नैनोमीटर वाले चिप्स निर्माण का लक्ष्य- वैष्णव
सरकार का लक्ष्य 2032 तक आधुनिक स्मार्टफोन और कंप्यूटर जैसे उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले 3 नैनोमीटर नोड के उच्च तकनीक वाले छोटे चिप्स का निर्माण करना है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, सरकार डिजाइन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना के दूसरे चरण के तहत छह श्रेणियों के चिप्स कंप्यूट, रेडियो फ्रीक्वेंसी, नेटवर्किंग, पावर, सेंसर और मेमोरी पर ध्यान केंद्रित करेगी। इस योजना के तहत देश की कंपनियों को 70-75 फीसदी तकनीकी उत्पादों के विकास पर प्रमुख नियंत्रण मिलेगा। वैष्णव ने कहा, डिजाइन तो हम आज भी कर रहे हैं, लेकिन निर्माण के मामले में हमें 3 नैनोमीटर तक पहुंचना होगा। 2029 तक चिप्स के निर्माण और डिजाइन की एक बड़ी क्षमता होगी। इनकी हमारे देश में लगभग 70-75 फीसदी एप्लिकेशन में व्यावहारिक रूप से आवश्यकता होती है।
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