वित्त वर्ष 2016-17 तक रेल बजट और आम बजट को अलग-अलग पेश किया जाता था। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहली बार वित्तीय वर्ष 2017-18 में रेल बजट और आम बजट को एक साथ पेश कर 92 साल से चली आ रही प्रथा को समाप्त किया। पहले संसद में दो बजट पेश किए जाते थे एक 'रेल बजट' और दूसरा 'आम बजट'। भारत सरकार ने 21 सितंबर 2016 को आम बजट के साथ रेल बजट के विलय को मंजूरी दे दी। उस समय वित्त मंत्री अरुण जेटली थे। उन्होंने 1 फरवरी, 2017 को आजाद भारत का पहला संयुक्त बजट संसद में पेश किया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 01 फरवरी 2026 को बजट पेश करेंगी, इस में रेल बजट भी शामिल होगा। हालांकि, हमेशा ऐसा नहीं था। वित्त वर्ष 2016-17 तक केंद्रीय बजट से कुछ दिन पहले रेल बजट अलग से पेश किया जाता था। 2016 में रेल मंत्री रहे पीयूष गोयल ने आखिरी बार रेल बजट पेश किया था। 92 साल पुरानी यह प्रथा तब समाप्त हुई जब वित्त मंत्री अरुण जेटली ने वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए केंद्रीय बजट के साथ ही रेल बजट पेश किया।
भारतीय रेलवे के लिए वित्तीय वर्ष 2026 के लिए केंद्रीय बजट में 2.55 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया। ये राशि वित्तीय वर्ष 2025 के लिए आवंटित राशि के समान है। आम बजट में रेलवे को लेकर कोई नई घोषणा की बजाय पहले की घोषणाओं को पूरा करने पर जोर दिया गया गया। भारतीय रेलवे के लिए वित्त वर्ष 2026-27 बदलाव का बड़ा पड़ाव साबित हो सकता है। आगामी बजट में रेल मंत्रालय को 2.70 लाख करोड़ से 2.80 लाख करोड़ के बीच ऐतिहासिक आवंटन मिलने की उम्मीद है। सरकार का फोकस नई घोषणाओं तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वेटिंग लिस्ट के पुराने संकट को तकनीकी नवाचार से खत्म करने पर है। रेल मंत्री के 52 हफ्तों में 52 सुधार के फॉर्मूले की झलक बजट के हर प्रावधान में स्पष्ट रूप से दिखाई देगी।
यात्रियों की लंबी दूरी की यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए बजट में कई सौगातें छिपी हैं। जून तक 8 नई स्लीपर वंदे भारत चलाने का लक्ष्य है, जबकि पूरे वर्ष में ऐसी 12 ट्रेनों की सौगात मिल सकती है। मध्य वर्ग के यात्रियों के लिए अमृत भारत ट्रेनों का विस्तार जारी रहेगा। मार्च तक अमृत भारत का नया वर्जन 3.0 (पूरी तरह एसी कोच के साथ) लाने की तैयारी है। इसके लिए इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) तेजी से रैक तैयार कर रही है। दो वर्षों में वेटिंग लिस्ट की समस्या कम करने के लिए रेलवे अतिरिक्त कोच और नई पीढ़ी की ट्रेनों पर जोर देगा। बजट में ट्रैक दोहरीकरण, नई लाइनों के विस्तार व इंजन निर्माण के लिए पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी होगी। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत सैकड़ों स्टेशनों के कायाकल्प को और गति दी जाएगी।
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1947-48 में जब देश आजाद हुआ उस समय देश का रेल बजट 14 करोड़ 28 लाख रुपये का था। जैसे-जैसे देश में रेल की पटरियां और रेलगाड़ियां बढ़ीं रेलवे का आवंटन भी बढ़ता गया। साल 2014 मनमोहन सिंह की सरकार के आखिरी रेल बजट में रेल बजट के मद में 63,363 करोड़ रुपये खर्च होने की बात कही गई थी। पिछले साल 2024-25 के बजट में रेल बजट का आकार बढ़कर 2,62,200 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। इसे देश के आम बजट के साथ ही पेश किया गया था।
रेलवे के लिए अलग बजट की प्रथा 1924 में शुरू हुई थी। यह फैसला एकवर्थ समिति की सिफारिशों के आधार पर लिया गया था, पर 2017 से रेल बजट आम बजट के साथ ही पेश किया जाने लगा। 1921 में ईस्ट इंडिया रेलवे कमेटी के चेयरमैन सर विलियम एक्वर्थ रेलवे को एक बेहतर मैनेजमेंट सिस्टम में लाए थे। इसके बाद उन्होंने 1924 में इसे आम बजट से अलग पेश करने का फैसला किया तब से लेकर साल 2016 तक यह अलग-अलग पेश किया जाता रहा। भारत को आजादी मिलने के बाद पहला रेल बजट 1947 में देश के पहले रेल मंत्री जॉन मथाई ने पेश किया था। मथाई ने भारत के वित्त मंत्री के रूप में दो आम बजट भी पेश किए थे। 2016 में रेल मंत्री रहे पीयूष गोयल ने आखिरी बार रेल बजट पेश किया था।
नवंबर 2016 में, रेल मंत्रालय ने घोषणा की कि केंद्र सरकार रेल बजट का केंद्रीय बजट में विलय कर देगी। यह निर्णय नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबरॉय की अध्यक्षता वाली एक समिति की सिफारिशों और देबरॉय और किशोर देसाई द्वारा 'रेल बजट के साथ वितरण' पर एक अलग पत्र पर आधारित था। इसके अनुसार यह तय किया गया कि वित्त मंत्रालय रेलवे के अनुमानों के साथ एक विनियोग विधेयक तैयार करेगा और संसद में प्रस्तुत करेगा। वित्त मंत्रालय इससे जुड़े सभी विधायी कार्य भी संभालेगा। भारतीय रेलवे को सरकार को लाभांश का भुगतान करने से छूट दी जाएगी। इसके साथ ही रेलवे का पूंजी प्रवाह समाप्त कर दिया जाएगा। इसके स्थान पर रेल मंत्रालय को अपने पूंजीगत व्यय के हिस्से को कवर करने के लिए वित्त मंत्रालय से सकल बजटीय सहायता मुहैया कराई जाएगी। इसके अतिरिक्त यह भी तय किया गया कि भारतीय रेलवे अपने पूंजीगत व्यय को वित्तपोषित करने के लिए अतिरिक्त बजटीय संसाधनों के माध्यम से बाजार से संसाधन जुटाना जारी रखेगी।
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वर्ष 1947 में जब भारत आज़ाद हुआ तब भी रेलवे से होने वाली राजस्व की प्राप्ति आम बजट की आमदनी से 6 प्रतिशत अधिक थी। तब सर गोपालस्वामी आयंगर समिति ने यह सिफारिश दी थी कि अलग रेलवे बजट की यह परम्परा जारी रहनी चाहिए। इस आशय के संबंध में 21 दिसंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा एक प्रस्ताव अनुमोदित किया गया था। गौरतलब है कि इस अनुमोदन के अनुसार 1950-51 से लेकर अगले पांच साल तक की अवधि के लिये ही रेलवे बजट को अलग पेश किया जाना था। लेकिन यह परम्परा 2016 तक जारी रही। देश की आजादी के बाद धीरे-धीरे रेलवे के राजस्व में कमी आने लगी और 70 के दशक में रेलवे बजट कुल राजस्व प्राप्ति का 30 प्रतिशत ही रह गया। 2015-16 तक यह आंकड़ा राजस्व का 11.5 प्रतिशत पर पहुंच गया। उसके बाद विशषज्ञों ने अलग रेलवे बजट को समाप्त करने का सुझाव दिया था। इसके बाद सरकार ने रेल बजट और आम बजट का विलय कर दिया।
रेल और आम बजट के विलय का उद्देश्य केंद्र सरकार के वित्तीय लक्ष्य को एक समग्र दृष्टिकोण देने के अलावे राजमार्गों, रेलवे और जलमार्गों के बीच परिवहन योजना में सुधार करना था। ऐसा करने से वित्त मंत्रालय को मध्य-वर्ष की समीक्षा के दौरान संसाधनों का आवंटन तय करने में अधिक लचीलापन हासिल हुआ।