पिछला साल एविएशन सेक्टर के लिए चुनौतीपूर्ण रहा, जहां तकनीकी खामी और परिचालन संबंधी संकटों के कारण उड्डयन सेक्टर परेशानियों से जूझता रहा। बजट में उम्मीद की जा रही है कि सरकार एविएशन सेक्टर का बुनियादी ढांचे का दर्जा बहाल कर सकती है।
देश के आसमान में उड़ानों की रफ्तार बढ़ाने के लिए आगामी आम बजट में नागरिक उड्डयन क्षेत्र को बड़ी सौगातें मिल सकती हैं। पिछला साल इस क्षेत्र के लिए चुनौतीपूर्ण रहा, जहां तकनीकी खामियों और परिचालन संबंधी संकटों ने यात्रियों को परेशान किया। अब सरकार का पूरा ध्यान इन बाधाओं को दूर कर घरेलू विमानन बाजार को नई ऊंचाई देने पर है। माना जा रहा है कि इस बार बजट में न केवल आवंटन बढ़ेगा, बल्कि इस पूरे क्षेत्र को बुनियादी ढांचे का दर्जा देने की पुरानी मांग भी पूरी हो सकती है। इससे विमानन कंपनियों को बैंकों से आसान और सस्ता कर्ज मिल सकेगा।
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400 हवाई अड्डों का खाका
केंद्र देश में हवाईअड्डों का जाल बिछाने की तैयारी में है। मौजूदा 164 हवाईअड्डों की संख्या को साल 2047 तक 400 तक ले जाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। इसी दिशा में बजट में 10 नए हवाईअड्डों की घोषणा संभव है।
नागरिक उड्डयन मंत्री राममोहन नायडू ने भी संकेत दिए हैं कि अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डों पर भीड़ कम करने के लिए उनके आसपास के 150 किमी के दायरे में छोटे हवाई अड्डे विकसित किए जाएंगे।
बजट का एक बड़ा हिस्सा स्वदेशी विमान निर्माण और शोध पर केंद्रित रह सकता है। सरकार चाहती है कि भारत केवल विमानों का खरीदार न बनकर उनके निर्माण और मरम्मत का बड़ा केंद्र बने।
इसके लिए विमानों के रखरखाव और कलपुर्जों की रिपेयरिंग के लिए विशेष प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं। इससे विदेशी कंपनियां भी भारत में निवेश के लिए आकर्षित होंगी और देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।