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Budget 2024-25: कैंसर की दवाओं के सस्ते होने से बड़ी राहत, विशेषज्ञों ने कहा- बड़ा फैसला मरीजों के लिए

आशीष तिवारी
Updated Tue, 23 Jul 2024 03:23 PM IST

सार

चिकित्सकों का कहना है कि देश में कैंसर की दवाओं की कीमत बहुत ज्यादा है। ऐसे में बजट के इस फैसले पर जितनी जल्दी अमल किया जाएगा, मरीजों को उतना ज्यादा फायदा होगा। वहीं दवा उत्पादक संघ ने भी फैसले को मरीज के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण बताया है।
 
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कैंसर मरीजों को राहत - फोटो : अमर उजाला


कैंसर की दवाओं की कीमत बहुत ज्यादा

चिकित्सकों का कहना है कि देश में कैंसर की दवाओं की कीमत बहुत ज्यादा है। ऐसे में बजट के इस फैसले पर जितनी जल्दी अमल किया जाएगा, मरीजों को उतना ज्यादा फायदा होगा। वहीं दवा उत्पादक संघ ने भी फैसले को मरीज के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण बताया है।


वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में कैंसर की दवाओं को सस्ता करने की घोषणा की है। सोसाइटी फॉर इंडियन ऑन्कोलॉजिस्ट के चिकित्सक डॉक्टर वैभव पांडे कहते हैं कि लंबे समय से कैंसर की महंगी दवाओं को सस्ता करने की मांग की जा रही थी। खासतौर से उन दवाओं को जो कैंसर के मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। वह कहते हैं कि इन दवाओं पर कस्टम ड्यूटी कम करने से निश्चित तौर पर बड़ा असर दवा की कीमतों पर पड़ने वाला है। डॉक्टर पांडे का कहना है कि कस्टम ड्यूटी कितनी कम होगी और किन दवाओं पर कम होगी यह भी देखना होगा। लेकिन पिछले महीने उनकी एसोसिएशन की ओर से वित्त मंत्रालय को ज्ञापन भी इस बाबत दिया गया था। वह कहते हैं कि इस पर कस्टम ड्यूटी कम करने का लिया गया फैसला मरीजों के लिहाज से बहुत बड़ा फैसला है।


भारत में कैंसर के सबसे ज्यादा मामले

कैंसर विशेषज्ञ डॉ सीमा मेहता कहती हैं विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट लगातार इस और इंगित कर रही है कि अगले 25 सालों के भीतर भारत में कैंसर के सबसे ज्यादा मामले होंगे। बेहतर है कि लोग इन बीमारियों से बचाव के लिए वह सभी सावधानियां बरतें, जो लगातार बताई जा रही हैं। डॉ. मेहता कहती हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक 2022 में अपने देश में 14 लाख से ज्यादा नए कैंसर के मामले सामने आए थे। इसी रोग के चलते तकरीबन नौ लाख से ज्यादा मौतें भी हुई हैं।


कस्टम ड्यूटी कम करने का फैसला

उनका कहना है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की और से पूरी दुनिया में इस बीमारी पर सर्वे करने वाली इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर की रिपोर्ट बताती है कि आने वाले 25 साल इस बीमारी के लिहाज से बेहद भयावह होने वाले हैं। अनुमान के मुताबिक पूरी दुनिया में 77 फीसदी कैंसर के मामले बढ़ेंगे। ऐसे में महंगी दवाई निश्चित तौर पर भारत जैसे विकासशील देशों में बड़ी चुनौती रहेगी। डॉ. सीमा कहती हैं कि इस बजट में जिस तरीके से कैंसर की दवाओं की कीमतों पर कस्टम ड्यूटी कम करने का फैसला लिया गया है, वह बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला है।


कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हरप्रीत निरंजन कहते हैं कि कैंसर की जिन तीन दवाओं पर कस्टम ड्यूटी कम की गई है, वह बेहद कारगर दवाएं हैं। डॉ निरंजन कहते हैं कि केंद्र सरकार के बजट में सिर्फ दवाओं पर ही कस्टम ड्यूटी नहीं कम की गई है। बल्कि कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली मशीनों और अनुपकरणों पर भी कस्टम ड्यूटी कम करने का फैसला लिया गया है। वह कहते हैं कि जिस तरीके से कैंसर जैसी घातक और गंभीर बीमारी में मरीजों को लाभ देने के लिए इस बजट में प्रावधान किया गया है वह स्वागत योग्य है। उनका कहना है कि इससे पहले भी गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं और उपपकरणों की कीमतों को बजट के दौरान कमी के फैसले होते रहे हैं। लेकिन जिस तरीके से देश में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी बढ़ रही है, उसमें यह फैसला मरीज के लिहाज से बहुत बेहतर है।


कस्टम ड्यूटी घटाने से दवाओं की कीमत कम होगी

पंजाब के डेराबस्सी में दवा उत्पादक संघ से जुड़े सुनील बंसल बताते हैं कि निश्चित तौर पर कस्टम ड्यूटी घटाने से दवाओं की कीमत कम होगी। वह कहते हैं कि जिन दवाओं को विदेश से मंगाया जाता है, उन पर भी इंपोर्ट ड्यूटी अगर कम हो सकती तो और ज्यादा फायदा होता। हालांकि बंसल कहते हैं कैंसर की मेडिसिन में इस्तेमाल किए जाने वाले कच्चे माल पर अगर राहत मिल रही है, तो निश्चित तौर पर दबाव के उत्पादन में भी बड़ा फायदा होने वाला है। वह उम्मीद करते हैं कि बजट में मिली इस राहत को जल्द से जल्द लागू कर दिया जाएगा। ताकि मरीजों को इसका लाभ मिलना शुरू हो सके।

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