एलआईसी ने ओएनजीसी जैसी सरकारी कंपनियों में भारी निवेश कर रखा है। हाल ही में इसने आईडीबीआई बैंक में 51 फीसदी हिस्सेदारी लेकर उसे संकट से बाहर निकाला है। 2018 में बढ़ते एनपीए की वजह से आईडीबीआई को आरबीआई ने पीसीए की सूची में डाल दिया था।
इसलिए बुरे वक्त से गुजर रही एलआईसी
सरकार की स्वामित्व वाली बीमा कंपनी एलआईसी भी बुरे दौर से गुजर रही है। एलआईसी पर नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट (एनपीए) का बोझ बढ़ गया है। पांच सालों में कंपनी का एनपीए दोगुना हो गया है। एलआईसी के पास मौजूद नकदी के बड़े भंडार पर जोखिम बढ़ रहा है।
नकदी भंडार की वजह से एलआईसी, सरकार के लिए भी संकटमोचन का काम करती रही है। एलआईसी ने सार्वजनिक कंपनियों और बैंकों के शेयर खरीद कर उनको बचाने का भी काम किया है। लेकिन एलआईसी के नवीनतम बहीखाता देखने से कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आई हैं। 2019-20 के पहले छह महीनों (अप्रैल-सितंबर) में एलआईसी के एनपीए में 6.10 फीसदी की बढ़त हुई है।
दोगुना हुआ एनपीए
एलआईसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 30 सितंबर 2019 तक कुल 30000 करोड़ रुपये का सकल एनपीए है। रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2019 में कंपनी का सकल एनपीए 6.10 प्रतिशत रहा जोकि पिछले पांच सालों में लगभग दोगुना है। यह एनपीए निजी क्षेत्र के यस बैंक, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक के करीब ही है।
डेक्कन क्रॉनिकल, एस्सार पोर्ट, गैमन, आईएलएंडएफएस, भूषण पावर, वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज, आलोक इंडस्ट्रीज, एमट्रैक ऑटो, एबीजी शिपयार्ड, यूनिटेक, जीवीके पावर और जीटीएल आदि में एलआईसी का 25 हजार करोड़ रुपये एनपीए के तौर पर अटका हुआ है।
वहीं एलआईसी ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड, इंफ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंसियल सर्विसेज (डीएचएफएल) और अनिल अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस ग्रुप सहित कई संकटग्रस्त कंपनियों को भारी-भरकम कर्ज दे रखा है।