ओडिशा सरकार ने लोकसभा और ओडिशा विधानसभा चुनावों से पहले गुरुवार को मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (ASHA) का मासिक पारिश्रमिक 4,500 रुपये से बढ़ाकर 7,000 रुपये कर दिया। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं के लिए सेवा निकास प्रोत्साहन राशि 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी है।
ओडिशा के मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि इस निर्णय से राज्य में 49,522 आशा कार्यकर्ताओं को लाभ मिलने की उम्मीद है। राज्य सरकार का अनुमान है कि आशा कार्यकर्ताओं के बढ़े हुए पारिश्रमिक के कारण 148.57 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वार्षिक व्यय होगा।
इस समायोजन के साथ, आशा कार्यकर्ताओं के पारिश्रमिक के लिए कुल खर्च सालाना 209 करोड़ रुपये होगा, साथ ही निकास प्रोत्साहन के भुगतान के लिए अतिरिक्त 55 लाख रुपये होंगे।
आशा कार्यकर्ता महिलाओं में जागरूकता पैदा करने में लगी हुई हैं। उन्होंने गर्भवती और प्रसवोत्तर महिलाओं के लिए विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में सफलतापूर्वक जागरूकता पैदा की है। वे राज्य में टीकाकरण और संस्थागत प्रसव में भी योगदान दे रहे हैं।
इससे पहले, 29 फरवरी को, मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मासिक पारिश्रमिक में 7,500 रुपये से 10,000 रुपये की वृद्धि की घोषणा की थी, साथ ही निकास प्रोत्साहन को 40,000 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया था।
'लोगों को स्वच्छ हवा और पानी का अधिकार', वेदांता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने की ये टिप्पणी
उच्चतम न्यायालय ने सतत विकास के सिद्धांत को बरकरार रखते हुए प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि लोगों को स्वच्छ हवा में सांस लेने, स्वच्छ पानी पीने और बीमारी मुक्त जीवन जीने का अधिकार है।
तमिलनाडु के थूथुकुडी में वेदांता समूह की कंपनी स्टरलाइट कॉपर को बंद करने के संबंध में एक तर्कसंगत आदेश में प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उद्योग बंद करना मकसद नहीं था।
लेकिन वेदांता की इकाई द्वारा प्रकृति और पर्यावरणीय मानदंडों के खिलाफ बार-बार किए गए गंभीर उल्लंघनों ने वैधानिक अधिकारियों व मद्रास उच्च न्यायालय के पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा था। सुप्रीम कोर्ट की पीठ जिसमें न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल थे ने 29 फरवरी को उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ वेदांता लिमिटेड की अपील खारिज कर दी थी।
प्रदूषण संबंधी चिंताओं के चलते मद्रास हाईकोर्ट ने तांबा गलाने वाले संयंत्र को बंद करने का निर्देश दिया था। यह प्लांट मई 2018 से बंद पड़ा है। इसी आदेश को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दी गई थी।
एयरबस को भारत में एच-160 हेलिकॉप्टर के लिए डीजीसीए की मंजूरी
एयरबस को भारत में अपने नई पीढ़ी के एच-160 हेलिकॉप्टर के लिए विमानन नियामक डीजीसीए से मंजूरी मिल गई है। बहुउद्देश्यीय हेलिकॉप्टर एच-160 का उपयोग तटीय परिवहन, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं, निजी और व्यावसायिक विमानन और सार्वजनिक सेवाओं सहित अन्य के लिए किया जा सकता है।
भारत और दक्षिण एशिया के एयरबस हेलिकॉप्टर के प्रमुख सनी गुगलानी ने कहा कि उसके एच-160 हेलिकॉप्टर को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने स्वीकृति पत्र प्रदान कर दी है। मंजूरी से भारत में दुनिया के सबसे आधुनिक हेलिकॉप्टर की शुरुआत का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा, एयरबस हेलिकॉप्टर भारत में एक समग्र हेलिकॉप्टर पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। एच-125 और डॉफिन के अलावा, एयरबस के एच-130, एच-135 और एच-145 पहले से ही भारत में विभिन्न कंपनियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।