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Biz Succession Plan: देश के बड़े कारोबारी घरानों में युवा पीढ़ी को सौंपी जा रही कमान, क्या हैं इसके मायने

Thu, 15 Aug 2024 10:27 AM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

भारत के सभी के सभी बड़े कारोबारी घरानों में नई पीढ़ी को जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। रिलायंस से लेकर अदाणी समूह तक में परिवार की नई पीढ़ी को कमान सौपने की खबर मीडिया की सुर्खियों बनी हैं। कंपनियों के निदेशक मंडल में नई पीढ़ी को शामिल किया जा रहा है। कारोबार के लिहाज से यह बदलाव कितना अहम है, आइए डालते हैं इस पर एक नजर।
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मुकेश अंबानी, गौतम अदाणी, कुमार मंगलम बिड़ला - फोटो : amarujala.com
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विस्तार
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भारत ने वर्ष 2047 तक खुद को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है। देश को अग्रणी राष्ट्रों की श्रेणी में शामिल करने का यह सपना बहुत हद तक देश के कारोबारी जगत के प्रदर्शन पर निर्भर करता है। आने वाले समय में देश में निजी क्षेत्र के बड़े कारोबारी घरानों का संचालन कितनी कुशलता और दूरदर्शिता से किया जाएगा देश का समग्र विकास लगभग उसी पर निर्भर है। ऐसे में इन बड़े कारोबारी घरानों में उत्तराधिकार को लेकर वर्तमान में हो फैसले लिए जा रहे हैं वे उन बिजनेस घरानों के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है।

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भारत में सही समय पर अपना उत्तराधिकारी चुना जाना कोई नई बात नहीं है। लेकिन अरबों डॉलर की संपत्ति के उत्तराधिकारियों की बात करें तो देश के तीन सबसे प्रमुख बिजनेस घरानों ने इस दिशा में समय रहते कदम आगे बढ़ाया है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी की ओर से उनके तीन बच्चों को समूह की कंपनियों के बोर्ड में नियुक्त किए जाने का फैसला हाल के वर्षों में लिया गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी ने अपने तीन बच्चों को समूह की कंपनियों के बोर्ड में नियुक्त किया। 31 वर्षीय जुड़वां ईशा और आकाश और 28 वर्ष के अनंत को शेयरधारकों की मंजूरी के बाद बोर्ड में शामिल किया गया। 

एक रिपोर्ट के अनुसार इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आदित्य बिड़ला समूह के प्रमुख कुमार मंगलम बिड़ला ने भी अपने बच्चों अनन्या और आर्यमन को हिंडाल्को के बोर्ड में नियुक्त करने की घोषणा की। वहीं अदाणी समूह के प्रमुख गौतम अदाणी भी अरबों डॉलर के अपने कारोबारी साम्राज्य के लिए उत्तराधिकार योजना की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। उन्होंने भी एलान कर दिया है कि वे 70 वर्ष की आयु के बाद अपने बेटों और भतीजों को कमान सौंपकर रिटायरमेंट ले लेंगे। 
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करोबारी लिहाज से कितना अहम है उत्तराधिकार का चयन?
बाजार के विशेषज्ञ कहते हैं कि इसमें कुछ नया नहीं है, उत्तराधिकारी के मसले पर सभी कारोबारी घराने समय-समय पर फैसला लेते रहते हैं। इन फैसलों के जरिए नई पीढ़ी को कारोबार की कमान सौंपी जाती है। पर इसमें खास बात यह है कि पिछले कुछ सालों से इसे कारोबार की आवश्यकता अनुरूप किया जाने लगा है। पहले की तुलना में उत्तराधिकार योजना को अब बड़े कारोबारी रणनीतिक तौर पर ले रहे हैं। बाजार विशेषज्ञ जिमेश शाह बताते हैं कि वैश्विक स्तर पर भू राजनीतिक बदलावों के कारण कारोबार करने का ढंग बदलता जा रहा है। कारोबार का तेजी से डिजिटलिकरण हो रहा है। एआई के आने से भविष्य में कारोबार की पूरी रुपरेखा में व्यापक परिवर्तन होने के आसार है। ऐसे में बड़े कारोबारी घराने इन आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए युवा वर्ग को सामने रखने की रणनीति अपना रहे हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि आज नहीं तो कल नई पीढ़ी को कारोबार में उतरना है, और अगर अभी से उनके पास बदलावों और उससे जुड़ी चुनौतियों से निपटने का तजूर्बा होगा तो वे भविष्य में कारोबार को नई ऊंचाइयों पर लेने जाने में सक्षम होंगे। 

क्या शेयरधारकों का भरोसा भी है नई पीढ़ी के साथ? 
रिर्सच कंपनी सैमको के एनालिस्ट एस स्वामी कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि बड़े कारोबारी घरानों में ही नई पीढ़ी आगे आ रही है। छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों में भी करोबार के लिहाज से नई पीढ़ी का दखल बढ़ रहा है। मुझे लगता है कि नई पीढ़ी अपनी नई दृष्टि, नया जोश और काम करने का नया तरीका साथ लाती है। इससे शेयरधारकों को भी फायदा होता है, और वे भी भरोसे के साथ नई पीढ़ी का समर्थन करते हैं। मैं ऑटोमोबाइल कंपनी टीवीएस का उदाहरण देता हूं जहां अगली पीढ़ी के कार्यभार संभालने के बाद कपंनी की ओर से कई नए मॉडल पेश किए गए। नई पीढ़ी करोबार बढ़ाने की संस्कृति को आगे ले जाते हुए अपने साथ नवाचार भी लाते हैं। कारोबार को नई ऊंचाई पर ले जाने के लिहाज से यह नई सोच काफी मायने रखती है।

मुकेश अंबानी उत्तराधिकार के किस फॉर्मूले पर आगे बढ़ रहे?
रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रमुख मुकेश अंबानी ने अपने तीन बच्चों को समूह बोर्ड में नियुक्त किया था। 31 वर्षीय जुड़वां ईशा और आकाश और 28 वर्ष के अनंत को शेयरधारकों की मंजूरी के बाद बोर्ड में शामिल किया गया था। आकाश अंबानी रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के चेयरमैन हैं, जबकि ईशा अंबानी रिलायंस रिटेल यूनिट को संभाल रही हैं। मुकेश अंबानी के सबसे छोटे बेटे अनंत अंबानी जिनकी हाल ही में शादी हुई है वे न्यू एनर्जी कारोबार की कमान संभालते  हैं। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के अनुसार रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप करीब 234 अरब डॉलर है। मुकेश अंबानी की नेट वर्थ 111 अरब डॉलर है। कंपनी 21 साल से फॉर्च्यून ग्लोबल 500 सूची का हिस्सा है। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के अनुसार अंबानी दुनिया में 11वें और एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति हैं।

गौतम अदाणी ने उत्तराधिकार योजना पर क्या कहा है?
अदाणी समूह के मुखिया गौतम अदाणी ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह अपने अरबों डॉलर के साम्राज्य के लिए अपने उत्तराधिकारी की योजना की रूपरेखा को तैयार कर चुके हैं। वह जब 70 वर्ष की आयु के होंगे तो वह रिटायरमेंट ले लेंगे। इसके बाद के लिए उनके बेटे करण अदाणी (37) और जीत अदाणी (26) और उनके चचेरे भाई प्रणव अदाणी (45) और सागर अदानी (30) को पारिवारिक ट्रस्ट के माध्यम से उत्तराधिकारी नामित किया गया है। एक रिपोर्ट के अनुसार समूह की विभिन्न कंपनियों में हिस्सेदारी का हस्तांतरण एक गोपनीय समझौते के जरिए होगा। रिपोर्ट के अनुसार गौतम अदाणी बड़े बेटे करण वर्तमान में अदानी पोर्ट्स के प्रबंध निदेशक हैं, जबकि छोटे जीत अदानी एयरपोर्ट्स के निदेशक हैं। भतीजे प्रणव अदानी एंटरप्राइजेज के निदेशक हैं और भतीजा सागर अदानी ग्रीन एनर्जी के कार्यकारी निदेशक हैं। अदानी समूह का कुल बाजार पूंजीकरण 213 अरब डॉलर का है। समूह के पास इन्फास्ट्रक्चर, बंदरगाह, शिपिंग, सीमेंट और सौर ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में काम करने वाली 10 सूचीबद्ध कंपनियां हैं। ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के अनुसार गौतम अदाणी की नेट वर्थ फिलहाल 105 अरब डॉलर है।

कुमार मंगलम बिड़ला ने क्यों लिया उत्तराधिकार पर बड़ा फैसला?
बिड़ला समूह ने एक एक्सचेंज में फाइलिंग में  बताया कि 13 अगस्त को हुई बोर्ड मीटिंग में आदित्य बिड़ला की बेटी अनन्या और बेटा आर्यमन को हिंडाल्को के बोर्ड में शामिल करने का फैसला किया गया। इस मौके पर हिंडाल्को के प्रमुख कहा कि हिंडाल्को परिवर्तनकारी चरण की ओर है और  नए समाधानों के साथ कारोबार आगे बढ़ा रहा है, ऐसे में बोर्ड में अनन्या और आर्यमन को निदेशक के रूप में शामिल करने का यह सही समय है। उनके सुदृढ़ व्यवसायिक कौशल और स्थिरता पर फोकस को देखते हुए मुझे विश्वास है कि वे ऐसे मूल्यवान दृष्टिकोण कंपनी को प्रदान करेंगे जो कंपनी के लिए लाभकारी साबित होंगे। 26 बिलियन डॉलर की हिंडाल्को इंडस्ट्रीज राजस्व के हिसाब से दुनिया की सबसे बड़ी एल्युमीनियम कंपनी है और चीन के बाद कॉपर रॉड निर्माण में दूसरी बड़ी कंपनी है। उनकी बेटी अनन्या अपनी उद्यमशिलता की सफलता और संगीत के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने 17 साल की उम्र में स्वतंत्र माइक्रोफिन प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की, जो भारत की दूसरी सबसे बड़ी माइक्रोफिन संस्था है।

कंपनी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार आर्यमन विक्रम बिड़ला पूंजी निवेश और पेशेवर खेलों में अनुभवी हैं वे पहले से आदित्य बिड़ला के कई कारोबार में शामिल हैं। आदित्य बिड़ला ग्रुप की हिंडाल्को ने वित्त वर्ष 2025 की पहली तिमाही में शुद्ध लाभ 25.2 प्रतिशत बढ़कर 3,074 करोड़ रुपये होने की जानकारी दी है। एक साल पहले इसी तिमाही में कंपनी ने 2,454 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था।

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