सेबी ने सूचीबद्ध कंपनियों में स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति और इस्तीफे के नियमों में भी बड़ा बदलाव किया है। बाजार नियामक ने बताया कि नए स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति, पुनर्नियुक्ति और उन्हें हटाने की प्रक्रिया शेयरधारकों की अनुमति से ही पूरी होगी। अगर किसी स्वतंत्र निदेशक को उसकी कंपनी, होल्डिंग, सब्सिडियरी या सहायक कंपनी में पूर्णकालिक निदेशक बनाना है, तो एक साल का कूलिंग पीरियड रखना होगा।
इस पद के लिए चुने जाने वाले व्यक्ति का पारदर्शी तरीके से मूल्यांकन करना जरूरी होगा। इसमें आवेदक की पद के अनुकूल क्षमताओं का स्पष्ट उल्लेख जरूरी है। स्वतंत्र निदेशकों के साथ ही कंपनी के सभी निदेशकों की नियुक्ति शेयरधारकों की अनुमति से ही होगी।
अगर प्रबंधन में शामिल किसी व्यक्ति या उसके रिश्तेदार को स्वतंत्र निदेशक बनाया जाना है, तो तीन साल का कूलिंग पीरियड रखना होगा। अगर स्वतंत्र निदेशक इस्तीफा देता है, तो पहले ही इसकी पूरी जानकारी कंपनी की बोर्ड समिति के पास भेजी जाएगी। ये बदलाव 1 जनवरी, 2022 से लागू होंगे।
संपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) को अब नए फंड के रूप में जुटाई राशि में से न्यूनतम निवेश की मंजूरी मिल गई है। सेबी ने कहा कि एएमसी से जुड़ी योजनाओं में जोखिम के आधार पर न्यूनतम राशि के निवेश की छूट रहेगी। अभी न्यू फंड ऑफर (एनएफओ) के तहत जुटाई राशि का एक फीसदी या 50 लाख रुपये (जो भी कम हो) निवेश करना जरूरी होता है।