धोखाधड़ी करने वाले दोपहिया वाहनों पर बैठकर बिना सुरक्षा वाले एटीएम के आसपास घूमते हैं। ये इस ताक में रहते हैं कि कब उनके हाथ कोई शिकार लग जाए। उनकी मंशा होती है कि वे डेबिट कार्ड की क्लोनिंग करके और चतुराई से उन्हें बदलकर कार्डधारक की गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ कर सकें। कहानी यहीं समाप्त नहीं होती है। जब धोखेबाज आपके कार्ड के डिटेल्स चुरा लेता है तो कुछ समय बाद आपको झटके लगने लगते हैं क्योंकि आपको अपने खाते से पैसे निकलने के संदेश आने शुरू हो जाते हैं। जब तक आपको पता चलता है कि आपके साथ धोखा हुआ है तब तक आपके खाते से हजारों या लाखों की अच्छी खासी रकम जा चुकी होती है।
रिफंड देने या गलती मानने के लिए राजी नहीं होता है बैंक
ऐसे मामलों में बैंक के पास एक ही जवाब होता है कि आपके पिन से समझौता हुआ है, इसलिए इसका रिफंड नहीं हो सकता है। साइबर क्राइम ब्रांच के पास आपके मामले के लिए समय भी नहीं हो सकता है क्योंकि उनके पास ऐसे मामलों की हजारों फाइलें हैं। यदि समस्या में एक से अधिक बैंक शामिल हैं तो उनमें आपसी तालमेल एक अन्य बड़ा मुद्दा होता है।
लेनदेन में बरतें अतिरिक्त सावधानी
डिजिटल लेनदेन में अतिरिक्त सावधानी जरूरी है। कोशिश करें कि एक ऐसे कार्ड का उपयोग करें, जिसमें उतनी ही रकम हो कि अगर उसके साथ कोई धोखाधड़ी हो तो आपको बहुत फर्क नहीं पड़े। साथ ही एटीएम में कार्ड के उपयोग से बचना चाहिए। -अजय कुमार सिंह, निवेश विशेषज्ञ