एचडीएफसी, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक क्या थे?
निजी बैंकों में आईसीआईसीआई, एक्सिस, एचडीएफसी के बैंकिंग प्रबंधन, कौशल को उदाहरण के रूप में रखने पर अश्विनी राणा कहते हैं कि यह संस्थाएं पहले क्या थीं? पहले तो सरकारी वित्तीय संस्थाएं ही थीं। यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया बैंक में बदल गया। एचडीएफसी और आईसीआईसीआई भी। राणा का कहना है कि इन बैंकों के पास सामाजिक जिम्मेदारी कितनी है. इस पर गौर करना चाहिए। इसके अलावा यह ग्राहकों के साथ जिस तरह से बैंकिंग कर रही है, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक नहीं कर सकते। सरकार ने सरकारी क्षेत्र के बैंकों में अपना दखल बढ़ा रखा है। बैंकिंग प्रोफशनलिज्म की छूट ही तुलना में काफी कम है।
केंद्र को बैंकों के विलय के फायदे गिनाने चाहिए
केन्द्र सरकार ने बैंकों के विलय का निर्णय लिया था। अब यह मर्जर करीब-करीब पूरा हो रहा है। बैंकिंग प्रणाली के जानकारों का कहना है कि हर बैंक की कंप्यूटर प्रणाली अलग-अलग थी। इसका विलय करने में ही पसीना आ गया। बैंक ग्राहकों को अभी भी परेशान होना पड़ रहा है। इसके अलावा बैंक की तमाम शाखाएं बंद हो रही हैं। आने वाले समय में बैंकिंग क्षेत्र में रोजगार भी कम होंगे। अश्विनी महाजन और अश्विनी राणा दोनों का ही कहना है कि केन्द्र सरकार को अपने इस निर्णय के फिलहाल फायदे गिनाने चाहिए। बैंकिंग कारोबार से जुड़े एक विशेषज्ञ का कहना है कि वह खुलकर कुछ नहीं करना चाहते। सरकार अर्थव्यवस्था में कई स्तर पर केवल प्रयोग करती नजर आ रही है। केन्द्र सरकार के नौकरशाहों या विदेशी सलाहकारों के प्रयोग से अभी स्थिति में बड़ा सुधार नहीं दिखाई दे रहा है।
'सरकार उपक्रमों को बेच कहां रही है, नियंत्रण दे रही है'
भाजपा के प्रवक्ता और अर्थशास्त्र की समझ रखने वाले गोपाल कृष्ण अग्रवाल इसे केन्द्र सरकार का अच्छा कदम बताते हैं। उनका कहना है कि बैंक की खराब हालत यूपीए सरकार की देन है। मोदी सरकार इस बैंकिंग क्षेत्र में बड़ा सुधार कर रही है। यूपीए के समय में खराब लोन बांटने के कारण बैंक बदहाल हुए, एनपीए बढ़ा, जिसके कारण बैंकों का मर्जर करना पड़ा। हालांकि गोपाल कृष्ण अग्रवाल बैंकों के मर्जर के लाभ नहीं गिना सके। वह केन्द्र सरकार द्वारा रेलवे के निजीकरण, एयर इंडिया और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों को निजी हाथों में देने के सवाल पर कहते हैं कि यह अच्छा कदम है। अग्रवाल के अनुसार सरकार उपक्रमों को बेच नहीं रही है, बल्कि कुशल संचालन के लिए बाजार मूल्य पर शेयर लेकर इन उपक्रमों का नियंत्रण निजी क्षेत्र के लोगों (पब्लिक) को दे रही है।