सार्वजनिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) में चीनी बनाने वाली कंपनी बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड के खिलाफ दिवालिया घोषित करने की याचिका दायर की है। एसबीआई के इस कदम से कर्ज के बोझ तले दबी कंपनी बजाज समूह की मुसीबतें अब और बढ़ सकतीं हैं। बता दें कि एसबीआई की ओर से बीते कारोबारी दिन मंगलवार को नियामकीय फाइलिंग में इस बारे में जानकारी दी गई है।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक एसबीआई ने इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी (IBC) के तहत एक वित्तीय कर्जदाता के तौर पर एनसीएलटी की इलाहाबाद पीठ के समक्ष कंपनी को दिवालिया घोषित करने की यह याचिका दायर की है। यह याचिका दिवाला व ऋणशोधन अक्षमता संहिता 2016 की धारा सात के तहत दाखिल की गई है।
बता दें चीनी उत्पादक कंपनी बजाज हिंदुस्तान शुग पर कई बैंकों के कर्ज बकाया है, जिनमें सबसे अधिक राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का है। एसबीआई के अलावे कंपनी पर पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसे बैंकों की भी देनदारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड पर बैंकों का करीब 4,800 करोड़ रुपये का बकाया है।
कंपनी ने शेयर बाजारों को दी सूचना
बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड ने शेयर बाजारों को भेजी गई सूचना में बताया है कि एसबीआई ने अपने वकील के माध्यम से कंपनी को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए याचिका लगाई है। बता दें कि बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड का मुख्यालय मुंबई में स्थित है जबकि इसके सभी 14 चीनी मिल उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों में मौजूद हैं।
कंपनी के चीनी मिलों की कुल पेराई क्षमता 1,36,000 टन प्रतिदिन है। इसके अलावे कंपनी के पास छह डिस्टलरीज भी हैं, जिनकी इंडस्ट्रियल अल्कोहल उत्पादन क्षमता 800 लीटर्स प्रतिदिन की है। कंपनी अपने चीनी मिलों में करीब 430 मेगावाॅट बिजली का भी उत्पादन करती है।
लंबे समय से घाटा झेल रही है कंपनी
बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड लंबे समय से घाटा झेल रही है। पिछले वित्तीय वर्ष में कंपनी ने करीब 5,607 करोड़ रुपये का कारोबार किया जबकि उसे समेकित रूप से 267.54 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा झेलना पड़ा। 12 अगस्त को कंपनी की ओर से चालू वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही के लिए जारी नतीजों में कंपनी ने घोषणा की है कि उसे जून में समाप्त हुई तिमाही में कुल आय 1,538 करोड़ रुपये की हुई और इस दौरान उसे 45 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ।