इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि महाराष्ट्र के कई जिलों में आईसीयू बेड और ऑक्सीजन की भारी कमी हो गई है। ग्लोबल फाउंडेशन के अनुसार औरंगाबाद के अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलिंडरों की कमी हो गई है।
इंदौर के संयंत्रों को केवल मेडिकल ऑक्सीजन के उत्पादन के लिए पाबंद किया गया
मध्यप्रदेश में कोविड-19 से सबसे ज्यादा प्रभावित इंदौर जिले के अस्पतालों में मेडिकल ऑक्सीजन की मांग चरम पर पहुंच गई है, इसके मद्देनजर प्रशासन ने जिले में स्थित सभी संयंत्रों से अन्य कारखानों को औद्योगिक ऑक्सीजन की आपूर्ति पर रोक लगा दी है और संयंत्र मालिकों को आदेश दिया है कि फिलहाल वे अपनी पूरी क्षमता से केवल मेडिकल ऑक्सीजन का उत्पादन करें। जिलाधिकारी मनीष सिंह ने सोमवार को आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 और महामारी रोग अधिनियम 1897 के प्रावधानों के तहत इस बाबत आदेश जारी किया।
केंद्र सरकार ने की थी ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की अपील
इसस पहले केंद्र सरकार ने सितंबर 2020 में महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, गुजरात, राजस्थान और मध्यप्रदेश से सभी स्वास्थ्य केंद्रों व अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने की अपील की थी। साथ ही केंद्र ने कोरोना वायरस महामारी के चलते ऑक्सीजन सिलिंडरों के एक राज्य से दूसरे में जाने पर किसी तरह की बाधा नहीं आने की बात भी सुनिश्चित करने को भी कहा था।
गीन कॉरिडोर बनाने की भी अपील
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस मुद्दे पर राज्यों के साथ एक वर्चुअल बैठक की थी। इस बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव, सचिव डीपीआईआईटी और सचिव फार्मास्यूटिकल्स के अलावा इन सात बड़े राज्यों के स्वास्थ्य सचिव और उद्योग सचिव भी मौजूद रहे। इस ऑनलाइन मीटिंग के दौरान केंद्रीय रेलवे व वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने भी शिरकत की। राज्यों से लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंकरों को शहर में लाने के लिए गीन कॉरिडोर बनाने की भी अपील की गई।
योगी आदित्यनाथ ने किया सबसे बड़े ऑक्सीजन संयंत्र का उद्घाटन
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अक्तूबर 2020 में राज्य के सबसे बड़े एवं अत्याधुनिक क्रायोजेनिक मोदीनगर ऑक्सीजन संयंत्र का उद्घाटन किया था, जिसकी मदद से अस्पतालों में ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिली। योगी आदित्यनाथ ने संयंत्र का उद्घाटन करते हुए कहा था कि बेहतर योजना के बावजूद कोविड-19 वैश्विक महामारी के दौर में मांग के अनुरूप ऑक्सीजन की आपूर्ति एक चुनौती बनी हुई थी, मगर इस संयंत्र से बड़ी राहत मिलेगी। योगी ने 'आईनॉक्स ग्रुप' द्वारा लगाए गए संयंत्र का डिजिटल माध्यम से उद्घाटन करने के बाद बताया कि इस संयंत्र से रोजाना 150 टन ऑक्सीजन की आपूर्ति होगी।
आईनॉक्स के ऑक्सीजन संयंत्र से मिलेगी राहत
उन्होंने कहा कि इसमें 1,000 टन तरल ऑक्सीजन की भंडारण क्षमता भी विकसित की गई है, यानी उत्तर प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य राज्यों को अब तरल ऑक्सीजन के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कोरोना वायरस संकट में सरकार की अच्छी योजना की वजह से कहीं भी कोई समस्या नहीं आई, लेकिन इसके बावजूद मांग के अनुरूप समयबद्ध तरीके से ऑक्सीजन की आपूर्ति सुनिश्चित करना एक चुनौती थी। ऐसे में आईनॉक्स के इस ऑक्सीजन संयंत्र से बड़ी राहत मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने 2018 में किया था ऑक्सीजन संयंत्र का शिलान्यास
योगी आदित्यनाथ ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जुलाई 2018 में सरकार द्वारा आयोजित समारोह में मोदीनगर ऑक्सीजन संयंत्र का शिलान्यास किया था। मुख्यमंत्री ने कहा, 'कोविड-19 ने हमें स्वास्थ्य संबंधी ढांचागत सुविधाओं को मजबूत करने के लिए आगाह भी किया है। उत्तर प्रदेश में अगर वही पुराना जर्जर ढांचा होता तो क्या स्थिति होती? उत्तर प्रदेश में कितनी मौतें होती, किस तरह की त्रासदी होती? लेकिन आज हम संकट में भी बेहतर परिणाम देने में सफल हुए हैं।'
बुंदेलखंड का पहला ऑक्सीजन प्लांट झांसी में शुरू
कोरोना की आपदा में झांसी समेत बुंदेलखंड ने ऑक्सीजन के मामले में आत्मनिर्भर बनने का काम किया। झांसी के गोरामछिया में बुंदेलखंड का पहला ऑक्सीजन प्लांट शुरू हुआ। अमर उजाला की तरफ से ऑक्सीजन की कमी का मुद्दा उठाए जाने के बाद सरकारी मशीनरी ने इसके लिए कवायद शुरू की। अब इसका लाभ बुंदेलखंड समेत आसपास के जिलों को भी मिलेगा।
गुजरात में बढ़ा वेंटिलेटर ने उत्पादन
सिर्फ ऑक्सीजन ही नहीं, देश में वेंटिलेटर की भी कमी हो रही है। देश में कोविड-19 की दूसरी लहर बढ़ने के साथ ही वेंटिलेटर की मांग फिर जोर पकड़ने लगी है और इसके चलते विनिर्माताओं ने इस जीवन रक्षक उपकरण का उत्पादन बढ़ा दिया है। इस उद्योग से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए गुजरात में वेंटिलेटर विनिर्माता उत्पादन में तेजी ला रहे हैं।
वडोदरा स्थित मैक्स वेंटीलेटर के संस्थापक और सीईओ अशोक पटेल ने बताया कि, 'कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों की ताजा लहर के कारण वेंटिलेटर की मांग बढ़ रही है।' उन्होंने कहा कि मौजूदा लहर में कुछ रोगियों पर गंभीर असर पड़ रहा है। इस लहर में, मरीजों को संक्रमण होने के पांच से छह दिनों के बाद वेंटिलेटर की जरूरत पड़ रही है, जबकि पहले वेंटीलेटर की आवश्यकता 10 से 15 दिनों के बाद होती थी।
उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी ने उत्पादन को प्रति माह 400 वेंटिलेटर तक बढ़ाया है, जो इस साल के पहले दो महीनों के दौरान बहुत कम था। कंपनी की आईसीयू वेंटिलेटर बनाने की क्षमता मार्च 2020 में सिर्फ 20 यूनिट प्रति माह थी। अब इस क्षमता को बढ़ाकर 1,000 इकाई प्रति माह तक कर दिया गया है।