आईफोन बनाने वाली दिग्गज टेक कंपनी एप्पल ने नया इतिहास रच दिया है। दरअसल, एप्पल तीन खरब डॉलर के बाजार मूल्यांकन वाली पहली कंपनी बन चुकी है। सोमवार को इसके शेयरों में आई बढ़त के साथ कंपनी की 3 ट्रिलियन डॉलर मार्केट वैल्यू हो गई। कंपनी के इस मुकाम पर पहुंचने का सफर बेहद दिलचस्प रहा और इसने आखिरी के एक ट्रिलियन की बढ़त बेहद तेजी से दर्ज की। अब इसकी कीमत भारत और ब्रिटेन की जीडीपी से अधिक हो गई है।
इस तरह तय किया सफर
एप्पल के इस मुकाम तक पहुंचने के सफर पर नजर डालें तो, 1976 में शुरू हुई एप्पल ने अगस्त 2018 में एक ट्रिलियन डॉलर का जादुई आंकड़ा छुआ था। उसे यह उपलब्धि हासिल करने में 42 साल का लंबा सफर तय करना पड़ा था। इसके साथ ही एक ट्रिलियन डॉलर बाजार मूल्यांकन से 2 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा तक पहुंचने में इसे करीब दो साल का समय लगा। जबकि, तीन ट्रिलियन डॉलर का आंकड़ा इसने बेहद तेजी से छुआ। एक रिपोर्ट के मुताबिक, तीन ट्रिलियन मार्केट वैल्यू होने में कंपनी को सिर्फ 16 महीने और 15 दिन का समय लगा है।
दिग्गज कंपनियों से निकली आगे
इस कीर्तिमान को हासिल करने के बाद वॉलमार्ट, डिज़्नी, नेटफ्लिक्स, नाइकी, एक्सॉन मोबिल, कोका-कोला, कॉमकास्ट, मॉर्गन स्टेनली, मैकडॉनल्ड्स, एटीएंडटी, गोल्डमैन सैक्स, बोइंग, आईबीएम और फोर्ड की तुलना में एप्पल का बाजार मूल्यांकन बढ़कर कहीं ज्यादा हो गया है। गौरतलब है कि बीते दिनों इसके शेयरों में उछाल के साथ इस जादूई आंकड़े तक पहुंचने के लिए एप्पल को थोड़ी बढ़त की जरूरत थी, जिसे सोमवार को कंपनी ने हासिल कर लिया।
भारत-ब्रिटेन की जीडीपी से ज्यादा वैल्यू
एप्पल ने इस उपलब्धि को पाकर भारत और ब्रिटेन को पीछे छोड़ दिया है। दरअसल, 3 ट्रिलियन की कंपनी बनने के बाद इसकी वैल्यू भारत और ब्रिटेन की नॉमिनल जीडीपी से ज्यादा हो गई है।गौरतलब है कि अमेरिका की नॉमिनल जीडीपी का आकार 20.49 ट्रिलियन डॉलर है। इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर चीन (13.4 ट्रिलियन डॉलर), तीसरे नंबर पर जापान (4.97 ट्रिलियन डॉलर) और चौथे नंबर पर जर्मनी (4.00 ट्रिलियन डॉलर) है। वहीं ब्रिटेन 2.83 ट्रिलियन डॉलर के साथ पांचवें, फ्रांस 2.78 ट्रिलियन डॉलर के छठे और भारत 2.72 ट्रिलियन डॉलर के साथ सातवें नंबर पर है। इस तरह एप्पल इस मार्केट कैप के हिसाब से दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी इकॉनमी बन चुकी है।