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एच-1बी वीजा उल्लंघनों के लिए अमेरिकी कंपनी करेगी 3.45 लाख डॉलर का भुगतान

Thu, 17 Sep 2020 03:16 PM IST
‌डिंपल अलवधी पीटीआई, नई दिल्ली
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एच1बी वीजा
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न्यूजर्सी स्थित एक कर्मचारी भर्ती कंपनी ने आरोपों को निपटाने के लिए 3.45 लाख अमेरिकी डॉलर देने पर सहमति जताई है। उसने अमेरिका में एच-1बी वीजा पर कर्मचारियों को लाने के दौरान आव्रजन और रोजगार नियमों का उल्लंघन किया है। 

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क्या है एच-1बी वीजा?
एच-1बी वीजा गैर-आव्रजक वीजा है। इसके जरिए अमेरिकी कंपनियां विशेषज्ञता वाले पदों पर विदेशी पेशेवरों की नियुक्ति कर सकती हैं। भारतीय आईटी पेशवरों के बीच एच-1बी वीजा की सबसे अधिक मांग रहती है। 

अमेरिका में आव्रजन एवं सीमा शुल्क प्रवर्तन (आईसीई) की आंतरिक सुरक्षा जांच (एचएसआई), श्रम विभाग और न्यूजर्सी जिले के अटॉर्नी ने सैवन्टिस को एच-1बी संबंधी उल्लंघनों के संबंध में लगाए गए आरोपों के समाधान के लिए 3.45 लाख डॉलर के भुगतान का आदेश दिया था। 
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भारत में भी है सैवन्टिस की उपस्थिति
सैवन्टिस, जिसका नाम पहले वैदिकसॉफ्ट था, की उपस्थिति भारत में भी है। कंपनी एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिकी में विदेश नागरिकों को नियुक्ति दिलाने के साथ ही परामर्श, प्रौद्योगिकी और कर्मचारी मुहैया कराने जैसे कार्यों में शामिल है। 

कई अनियमितताओं में शामिल पाई गई
आईसीई ने एक बयान में कहा कि जांच में पाया गया था कि जनवरी 2014 से जून 2018 तक सैवन्टिस के कई एच-1बी वीजाधारक कर्मचारियों को नियमित अंतराल पर जरूरी वेतन का भुगतान नहीं किया गया। बयान में कहा गया कि इसके अलावा भी सैवन्टिस कई अनियमितताओं में शामिल पाई गई।

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