बीयर की खपत
पिछले 10 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, बीयर और वाइन की खपत सबसे अधिक बढ़ी है। साल 2008 में बीयर की खपत 10,000 लाख लीटर थी, जो 2018 में 24,250 लाख लीटर हो गई है। मतलब एक दशक में बीयर की खपत 142 फीसदी बढ़ी है।
वाइन की खपत
वोदका की खपत
भारतीय युवाओं के बीच वोदका काफी प्रसिद्ध है। यही कारण है कि इसकी खपत में 122 फीसदी का इजाफा हुआ है। साल 2008 में भारत में 362 लाख लीटर वोदका की खपत हुई थी, जबकि 2018 में यह आंकड़ा 803 लाख लीटर हो गया। यानी एक दशक में वोदका की खपत में 122 फीसदी का इजाफा हुआ है।
ब्रांडी की खपत
बीयर, वाइन और वोदका के मुकाबले ब्रांडी की खपत में इजाफा अन्य के मुकाबले कम हुआ है। 2008 में जहां 2,930 लाख लीटर ब्रांडी की खपत हुई थी, वहीं 2018 में 5,650 लाख लीटर की खपत हुई है। इसमें 92 फीसदी का इजाफा हुआ है।
व्हिस्की की खपत
भारत में व्हिस्की काफी पसंद की जाती है लेकिन पिछले 10 सालों के आंकड़ों पर जाएं तो बीयर, वाइन, वोदका और ब्रांडी की खपत व्हिस्की से ज्यादा बढ़ी है। 2008 में भारत में 9,190 लाख लीटर व्हिस्की की खपत हुई थी, जो 2018 में 16,790 लाख लीटर हुई। एक दशक में इसमें 83 फीसदी की वृद्धि हुई है।
रम की खपत
रम की खपत की बात करें, तो इसमें ज्यादा अंतर नहीं आया है। एक दशक में रम की खपत 17 फीसदी बढ़ी है। 2008 में जहां 3,310 लीटर रम की खपत हुई थी, वहीं 2018 में रम की खपत 3,880 लीटर पर पहुंची।
जिन की खपत
एक ओर जहां बीयर, वाइन, व्हिस्की, रम और वोदका की खपत बढ़ी है, वहीं जिन मात्र ऐसा अलकोहल पेय है, जिसकी खपत घटी है। 2008 में भारत में 304 लाख लीटर जिन की खपत हुई थी, जो 2018 में घटकर 249 लाख लीटर हो गई। इसमें 18 फीसदी की गिरावट आई है।
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छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक शराब की खपत
जम्मू-कश्मीर में शराब की खपत सबसे कम
जिन राज्यों में शराब की खपत सबसे कम है, उनमें जम्मू-कश्मीर का नाम भी शामिल है। जम्मी-कश्मीर में महज 3.5 फीसदी लोग ही शराब पीते हैं। मेघालय में यह आंकड़ा 3.4 फीसदी है। वहीं राजस्थान में 2.1 फीसदी।
शराब पीने वाले लोगों की संख्या में उत्तर प्रदेश सबसे आगे
शराब पीने वाले लोगों की संख्या पर जाएं, तो इस सूची में उत्तर प्रदेश सबसे आगे है। उत्तर प्रदेश में 4.2 करोड़ लोग शराब पीते हैं। वहीं पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश में क्रमश: 1.4 करोड़ और 1.2 करोड़ लोग शराब पीते हैं।
भारत में जहां कुछ राज्यों में लाखों लोग शराब पीते हैं, वहीं कुछ राज्य ऐसे भी हैं, जहां शराब पीने पर प्रतिबंध लगा है। गुजरात, बिहार, नागालैंड, मिजोरम और लक्ष्द्वीप में शराब पीने की अनुमति नहीं है।
फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्तरां एसोसिएशन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष गिरीश ओबेरॉय का मानना है कि पहले शराब पीना बहुत आम नहीं था। 10 साल पहले तक ज्यादातर लोग सिर्फ घर पर या बाहर किसी पार्टी पर ही शराब पीते थे। लेकिन आज कल ऐसा नहीं है। अब युवा हफ्ते में कम से कम दो बार शराब पीते हैं।
प्रति व्यक्ति शराब की खपत
वैश्विक स्तर पर साल 1990 में प्रति व्यक्ति सालाना औसतन 5.9 लीटर शराब पी जाती थी, वहीं साल 2017 तक प्रति व्यक्ति सालाना औसतन 6.5 लीटर शराब पी जाती थी। भारत में साल 2017 में प्रति व्यक्ति सालाना औसतन 5.9 लीटर शराब पी गई, जो 1990 में 3.9 लीटर थी।
शराब के उपभोग की कुल मात्रा में 70 फीसदी बढ़ी
दुनिया में साल 1990 में कुल 2,09,990 लाख लीटर शराब पी गई। 2017 में यह आंकड़ा 3,567,60 लाख लीटर था। वर्ष 1990 के बाद से विश्व स्तर पर शराब के उपभोग की कुल मात्रा में 70 फीसदी की वृद्धि हुई है। शराब की बढ़ी खपत और जनसंख्या वृद्धि के परिणामस्वरूप, विश्व स्तर पर प्रतिवर्ष उपभोग की गई शराब की कुल मात्रा में 70 फीसदी की वृद्धि हुई है।
शराब से एक साल में 30 लाख लोगों की मौत
साल 2018 की विश्व स्वास्थ्य संगठन ( WHO ) की रिपोर्ट के अनुसार शराब से एक साल में 30 लाख लोगों की मौत होती है, जो एड्स ( AIDS ) और सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली मौत से भी ज्यादा है। वहीं यूएन हेल्थ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, 20 मृत्यु में से एक से ज्यादा लोगों की जान शराब की वजह से जाती है। शराब की वजह से महिलाओं की तुलना में पुरुषों की जान को ज्यादा खतरा है। शराब से 200 से भी ज्यादा बीमारियां होती हैं, जिसमें कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी भी शामिल है।
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