देशभर में अनलॉक के बाद जहां दूसरे सेक्टर तेजी से रिकवरी कर रहे हैं, वहीं विमानन कंपनियों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। दिसंबर में हवाई यात्रियों की संख्या में कोरोना से पहले के स्तर के 57 फीसदी ही पहुंची है। कंपनियां उनसे उतना भी किराया वसूल नहीं कर पा रही हैं, जितना सरकार ने इनके लिए निर्धारित किया है। वहीं, इस दौरान विमान ईंधन एटीएफ की लागत जरूर बढ़ गई है।
क्रूड ऑयल के दामों में बढ़ोतरी से पैदा हुईं चुनौतियां
ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल की एक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, कम आमदनी और बढ़ती हुई ऑपरेशनल कॉस्ट, खासतौर पर क्रूड ऑयल के दामों में बढ़ोतरी ने एविएशन इंडस्ट्री के सामने गंभीर चुनौतियां पैदा कर दी हैं। सरकार ने कोरोना महामारी को देखते हुए न्यूनतम और अधिकतम किराए की सीमा लागू की थी, लेकिन एयरलाइंस अपने यात्रियों से उतना किराया भी वसूल नहीं कर सकीं।
नए विमानों का भुगतान करना भी हो सकता है मुश्किल
वर्ष 2020 की चौथी तिमाही यानी अक्तूबर से दिसंबर में औसत विमान किराया मंत्रालय की प्रस्तावित किराए की बीच की सीमा से सात से 23 फीसदी कम था। जबकि पहली तिमाही में यह औसत से 29 से 47 फीसदी तक कम था। एयरलाइंस के सामने एक बड़ी समस्या ये भी है कि इन्होंने पहले ही 500 से ज्यादा नए विमान के ऑर्डर दे रखें हैं, जिनकी डिलीवरी अगले तीन से चार वर्षों में होनी है। ऐसे में इनके लिए भुगतान करना भी एक बड़ा बोझ साबित होगा।
कोरोना वैक्सीन पर टिकीं नजरें
विशेषज्ञों के मुताबिक, एयरलाइंस की सारी उम्मीदें अब कोरोना वैक्सीन के रोलआउट पर टिकी हुई हैं। कंपनियों को उम्मीद है कि वैक्सीन आने के बाद लोगों का हवाई उड़ानों के प्रति विश्वास और बढ़ेगा। दफ्तरों में मौजूदगी बढ़ने से प्रवासी कर्मचारी अपनी नौकरी वाले शहरों में लौटेंगे। इसी तरह घरेलू यात्रियों की संख्या में भी धीरे-धीरे इजाफा होगा।