क्या एयर इंडिया एक्सप्रेस और विस्तारा की चुनौतियां एक जैसी हैं?
एयर इंडिया एक्सप्रेस की स्थिति टाटा समूह के स्वामित्व वाली एक अन्य एयरलाइन विस्तारा में कुछ दिनों पूर्व आए पायलट संकट के ही समान है। विस्तारा ने हाल ही में 150 से अधिक उड़ानें रद्द की थीं और कई उड़ानें देर हो गईं थीं। उस दौरान भी पायलट सामूहिक बीमारी की बात कह कर छुट्टी पर चले गए थे। एयर इंडिया एक्सप्रेस कर्मचारी संघ (एआईएक्सईयू) द्वारा अप्रैल में टाटा समूह के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को भेजे गए पत्र में एचआरए जैसे भत्तों को हटाने समेत कई शिकायतें की गईं थीं। पत्र में कर्मचारियों के साथ व्यवहार में समानता की कमी की बात भी कही गई थी।
पत्र में कहा गया था कि आंतरिक नौकरियों में रिक्त स्थान को पोस्टिंग बाहरी उम्मीदवारों से भरा जा रहा है। योग्य आंतरिक (इन हाउस) उम्मीदवारों को दरकिनार किया जा रहा है। अप्रैल में भेजे गए पत्र के अनुसार, एचआरए सहित विभिन्न भत्ते, जो विलय से पहले मुआवजे का हिस्सा थे, को हटा दिया गया है। कंपनी ने कहा कि लगातार मुनाफा दर्ज करने के बावजूद कर्मचारियों के वेतन में कटौती की गई। पत्र में लिखा था, "कर्मचारियों के साथ व्यवहार में समानता का घोर अभाव है। वेतन, अनुभव और योग्यता की अवहेलना की जा रही है, आंतरिक नौकरियों में अब योग्य आंतरिक उम्मीदवारों को दरकिनार करते हुए एयर इंडिया एक्सप्रेस से बाहर के उम्मीदवारों को जगह दी जा रही है।"
विस्तारा एयरलाइन के संचालन में क्या परेशानी आई थी?
इससे पहले अप्रैल में टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयरलाइन विस्तारा एयरलाइन को पायलट्स के असंतोष से जुड़े व्यवधानों का सामना करना पड़ा था। उस दौरान 150 से अधिक उड़ानें रद्द की गई थीं। पायलट्स के सामूहिक बीमारी की बात कह कर छुट्टी पर चले जाने से कई उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ था।
सप्ताहांत में स्थिति और खराब हो गई थी जिसके कारण सोमवार को लगभग 80 उड़ानें रद्द कर दी गईं और 90 उड़ानों में देरी हुई। उसके बाद मंगलवार को भी कई उड़ान रद्द किए गए थे। जानकारों के अनुसार, ऐसी परिस्थिति बनने के मध्य में एयरलाइन का एचआर विभाग था, जिससे पायलट्स और केबिन क्रू सदस्य असंतुष्ट थे।
विस्तारा के एयर इंडिया के साथ विलय से पहले जिस वेतन संरचना की बात कही गई उसके अनुसार प्रति माह केवल 40 उड़ान घंटों के लिए भुगतान की गारंटी दी गई है, यह गारंटी पहले 70 घंटे की थी। एयरलाइन के कई अधिकारियों को आशंका है कि यह परिवर्तन उनके टेक-होम वेतन को काफी हद तक कम कर सकता है।
पायलट्स असंतोष के जवाब में विस्तारा के प्रबंधन ने एक अल्टीमेटम जारी किया, जिसमें पायलटों को नए वेतन ढांचे को स्वीकार करने या फिर विलय के बाद एयर इंडिया के साथ काम करने का मौका और इसके लिए मिलने वाली एकमुश्त भुगतान छोड़ने की बात कही गई। इस अल्टीमेटम के बाद हालात और बिगड़ गए और ज्यादातर पायलट बीमारी की बात कहकर छुट्टी पर जाने लगे। पायलटों ने एयर इंडिया के साथ विलय के बाद अपने वेतन और अपने करियर की प्रगति के बारे में चिंता जाहिर की। कुछ पायलट कंपनी की रोस्टरिंग प्रथाओं से नाखुश थे, उन्होंने दावा किया है कि उनके कार्य और निजी जीवन के संतुलन को एयरलाइन गंभीरता से प्रभावित कर रहा है। एयर इंडिया के साथ विस्तारा का विलय अगले साल पूरा होने की उम्मीद है।
टाटा समूह और एयर इंडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
पहले विस्तारा और अब एयर इंडिया एक्सप्रेस में व्यवधान टाटा समूह और एयर इंडिया के लिए संभावित चुनौतियों की ओर इशारा करते हैं। क्योंकि टाटा समूह आने वाले समय में एयरलाइन व्यवसाय को समेकित करने की दिशा में काम कर रहा है। एयर इंडिया और विस्तारा के विलय के अलावा, समूह अपने कम लागत वाले वाहकों, एयर इंडिया एक्सप्रेस और एआईएक्स कनेक्ट (पूर्व में एयर एशिया इंडिया) का भी विलय कर रहा है। इस प्रक्रिया के दौरान वेतन समानता लाना और विभिन्न संगठनात्मक उपायों के तहत ऊपरी और निचले स्तर के कर्मचारियों का एकीकरण समूह के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। 2007 में एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस के दौरान भी कुछ ऐसे ही हालात बने थे। तब विलय के बाद मानव संसाधन से जुड़े मुद्दों सुलझाने मे वर्षों लग गए थे और उस बीच की अवधि में कर्मचारियों के बीच स्थायी असंतोष को बढ़ावा मिला था।