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Gensol: गिरावट के बाद जेनसोल के संभले हालात, शेयरों में पांच प्रतिशत का आया उछाल; प्रमोटरों के इस्तीफे का असर

Tue, 13 May 2025 08:02 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सेबी की कार्रवाई के बाद जेनसोल इंजीनियरिंग के प्रमोटर अनमोल और पुनीत जग्गी ने इस्तीफा दिया। इसके बाद शेयर में पांच प्रतिशत की तेजी आई और यह अपर सर्किट पर बंद हुआ। लगातार 22 दिनों की गिरावट के बाद यह पहली बढ़त है। 

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जेनसोल इंजीनियरिंग - फोटो : जेनसोलईवी.कॉम
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विस्तार
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मुश्किलों में घिरी कंपनी जेनसोल इंजीनियरिंग के शेयरों में मंगलवार को जोरदार वापसी देखने को मिली। प्रमोटर अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी के इस्तीफे के बाद शेयर 5% चढ़कर बीएसई पर 57.28 रुपये और एनएसई पर 56.64 रुपये पर बंद हुआ। यह दोनों एक्सचेंजों पर शेयर का अपर सर्किट लिमिट था। दिन की शुरुआत में यह शेयर पांच प्रतिशत गिरकर 51.25 रुपये (52 हफ्तों का निचला स्तर) तक पहुंच गया था। वहीं पिछले 22 ट्रेडिंग सेशंस में यह शेयर करीब 66.6% टूट चुका था।

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प्रमोटर ने क्यों दिया इस्तीफा
बता दें कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के 15 अप्रैल के अंतरिम आदेश के बाद  जेनसोल इंजीनियरिंग लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर अनमोल सिंह जग्गी और पूर्णकालिक डायरेक्टर पुनीत सिंह जग्गी ने सोमवार को अपने-अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। जहां सेबी ने कंपनी और प्रमोटरों पर फंड डायवर्जन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस की अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। इसके बाद उन्हें प्रतिभूति बाजार से बाहर कर दिया गया और कंपनी द्वारा घोषित स्टॉक स्प्लिट पर भी रोक लगा दी गई।

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पैसे का निजी इस्तेमाल का आरोप
सेबी ने अनमोल और पुनीत जग्गी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने कंपनी के पैसे का निजी इस्तेमाल किया। खासकर एक बड़ी कर्ज राशि को, जो कि क्लीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए ली गई थी, उसका सही उपयोग नहीं हुआ। आरोप है कि यह पैसा रियल एस्टेट और प्रमोटरों से जुड़ी दूसरी कंपनियों में लगा दिया गया।
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कितना बड़ा घोटाला समझिए
मामले में सेबी के मुताबिक, 978 करोड़ रुपये का टर्म लोन भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (IREDA) और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) से लिया गया था। इसका इस्तेमाल 6,400 इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद के लिए होना था, जिन्हें जेनसोल की सहयोगी कंपनी ब्लूस्मार्ट मोबिलिटी को लीज पर देना था। लेकिन हकीकत में सिर्फ 4,700 गाड़ियां खरीदी गईं और वो भी करीब 567 करोड़ रुपये की लागत में। यानी कि 262 करोड़ रुपये का कोई साफ हिसाब नहीं मिला।

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