सेबी की कार्रवाई के बाद जेनसोल इंजीनियरिंग के प्रमोटर अनमोल और पुनीत जग्गी ने इस्तीफा दिया। इसके बाद शेयर में पांच प्रतिशत की तेजी आई और यह अपर सर्किट पर बंद हुआ। लगातार 22 दिनों की गिरावट के बाद यह पहली बढ़त है।
मुश्किलों में घिरी कंपनी जेनसोल इंजीनियरिंग के शेयरों में मंगलवार को जोरदार वापसी देखने को मिली। प्रमोटर अनमोल सिंह जग्गी और पुनीत सिंह जग्गी के इस्तीफे के बाद शेयर 5% चढ़कर बीएसई पर 57.28 रुपये और एनएसई पर 56.64 रुपये पर बंद हुआ। यह दोनों एक्सचेंजों पर शेयर का अपर सर्किट लिमिट था। दिन की शुरुआत में यह शेयर पांच प्रतिशत गिरकर 51.25 रुपये (52 हफ्तों का निचला स्तर) तक पहुंच गया था। वहीं पिछले 22 ट्रेडिंग सेशंस में यह शेयर करीब 66.6% टूट चुका था।
कितना बड़ा घोटाला समझिए
मामले में सेबी के मुताबिक, 978 करोड़ रुपये का टर्म लोन भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (IREDA) और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) से लिया गया था। इसका इस्तेमाल 6,400 इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद के लिए होना था, जिन्हें जेनसोल की सहयोगी कंपनी ब्लूस्मार्ट मोबिलिटी को लीज पर देना था। लेकिन हकीकत में सिर्फ 4,700 गाड़ियां खरीदी गईं और वो भी करीब 567 करोड़ रुपये की लागत में। यानी कि 262 करोड़ रुपये का कोई साफ हिसाब नहीं मिला।