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China: पश्चिम से टकराव बढ़ा तो मध्य एशिया को अपना बाजार बनाने में जुटा चीन; जानें पूरा मामला

Sun, 30 Apr 2023 03:16 PM IST
शक्तिराज सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

मार्च में मध्य एशियाई देशों के लिए चीन के निर्यात में 55 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। जबकि दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए उसके निर्यात में सिर्फ 35 प्रतिशत वृद्धि हुई। 
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शी जिनपिंग - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पश्चिमी देशों से बढ़ते टकराव के बीच चीन अपने निर्यात की दिशा बदलने की कोशिशों में जुटा हुआ है। अब उसका लक्ष्य मध्य एशियाई देशों को निर्यात ब़ढ़ाना है। इस मकसद में उसे कामयाबी मिलती भी नजर आ रही है। बीते मार्च में मध्य एशियाई देशों के लिए चीन के निर्यात में 55 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। जबकि दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए उसके निर्यात में सिर्फ 35 प्रतिशत वृद्धि हुई। 
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चीन पूर्व सोवियत गणराज्यों के साथ-साथ तुर्किये और ईरान को अपने निर्यात का बड़ा बाजार बनाने में जुटा हुआ है। उसकी यह कोशिश उसकी महत्त्वाकांक्षी योजना बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) से भी जुड़ जाती है। ज्यादातर मध्य एशियाई बीआरआई का हिस्सा हैँ। वेबसाइट एशिया टाइम्स पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक मध्य एशिया के लिए चीन का निर्यात 2018 की तुलना में तीन गुना अधिक हो चुका है। 

इस रिपोर्ट के मुताबिक कई पहलुओं ने इस वृद्धि में योगदान किया है। इनमें एक बड़ा पहलू चीन का निवेश है। चीन मध्य एशिया क्षेत्र में ऊर्जा, खनिज संसाधनों और रेल परिवहन के निर्माण में भारी निवेश कर रहा है। उसने चीन से किर्गिजस्तान और उज्बेकिस्तान तक रेल लाइन बनाने की योजना पेश की है। बताया जाता है कि इस परियोजना का निर्माण कार्य अगले वर्ष शुरू हो जाएगा।
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यूरोप, मध्य एशिया और उत्तर अमेरिका के 57 देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन फॉर सिक्युरिटी एंड को-ऑपरेशन इन यूरोप (ओएससीई) से संबंधित फॉरेन रिसर्च इंस्टीट्यूट  में फेलॉ निवा याउ त्स यान ने इस वर्ष मार्च में एक विश्लेषण में लिखा- यह रेल परियोजना दो लिहाज से चीन के लिए महत्त्वपूर्ण है। इससे एक तरफ उसके भू-राजनीतिक उद्देश्य पूरे होंगे और दूसरा यह कि इससे मध्य एशियाई देशों का समर्थन उसे शिनजियांग में वीगर मुसलमानों के मुद्दे पर मिल सकेगा। यान ने लिखा- यूक्रेन युद्ध के कारण ऐसे रास्ते अधिक फायदेमंद हो गए हैं, जो रूस से होकर ना गुजरें। ऐसे में चीन ने उज्बेकिस्तान पर नजर टिकाई है। 

साल 2019-22 के बीच ईरान के लिए चीन के निर्यात में गिरावट आई थी। यह 80 करोड़ प्रति महीने रह गया, जबकि 2014 में चीन हर महीने ईरान को 2.8 बिलियन डॉलर का निर्यात कर रहा था। लेकिन पिछले महीने ईरान के लिए चीन का निर्यात बढ़ कर मार्च 2022 की तुलना में दो गुना हो गया। 

उधर रूस के लिए चीनी निर्यात में हर महीने उछाल आ रहा है। इसी तरह तुर्किये के लिए भी उसका निर्यात बढ़ रहा है। बताया जाता है कि रूस को निर्यात करते हुए चीन ने अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने की कोशिश की है। इसके लिए वह बड़ी मात्रा में सामग्रियों का निर्यात तुर्किये और मध्य एशियाई देशों को कर रहा है। वहां से वे सामग्रियां रूस भेजी जा रही हैँ। बताया जाता है कि अब अमेरिका इन देशों पर प्रतिबंध लगाने पर  विचार कर रहा है। 

अमेरिकी विश्लेषक डेविड पी गोल्डमैन के मुताबिक कई कारणों से मध्य एशियाई देशों में चीन का प्रभाव बढ़ा है। इनमें सबसे बड़ा कारण उसकी इन्फ्रास्ट्रक्चर निर्माण और सस्ती सामग्रियों के निर्यात की क्षमता है। इनकी जरूरत हर देश को है।
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