तमिलनाडु के तूतीकोरिन में वेदांता का तांबा स्मेल्टर प्लांट बंद होने से देश में तांबे का आयात तेजी से बढ़ा है। इस कारण भारत 18 साल बाद रिफाइंड तांबे का शुद्ध आयातक बन गया है। रेटिंग एजेंसी केयर रेटिंग्स ने कहा कि भारत 2017-18 तक तांबा कैथोड का शुद्ध निर्यातक हुआ करता था। अब तूतीकोरिन प्लांट के बंद होने से तांबे के घरेलू उत्पादन में कमी आई है, जिससे आयात बढ़ा है और निर्यात घटा है।
केयर रेटिंग्स के मुताबिक, 2018-19 के दौरान भारत से तांबे के निर्यात में 87.4 फीसदी की गिरावट आई है, जबकि आयात 131.2 फीसदी बढ़ा है। इस अवधि में भारत ने जापान, कॉन्गो, सिंगापुर, चिली, तंजानिया, संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण अफ्रीका से रिफाइंड तांबे का आयात किया।
वहीं, चीन, ताइवान, मलयेशिया, दक्षिण कोरिया और बांग्लादेश को रिफाइंड तांबे का निर्यात किया। तमिलनाडु सरकार ने मई, 2018 में खूनी विरोध प्रदर्शन के बाद प्लांट को स्थायी रूप से बंद करने का आदेश दिया था।
चीन को निर्यात में बढ़ी हिस्सेदारी
रेटिंग एजेंसी के मुताबिक, 2018-19 में चीन को हुए तांबा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 2017-18 के 63 फीसदी से बढ़कर 75 फीसदी हो गई। वहीं, जापान से आयात का हिस्सा 68 फीसदी से बढ़कर 71 फीसदी हो गया। भारत तांबा अयस्क के आयातक के रूप में उभरा है।
देश में तांबे की खानों की कमी के कारण जरूरत का करीब 90 फीसदी तांबा आयात करना पड़ता है। तूतिकोरिन प्लांट बंद होने से पिछले वित्त वर्ष में तांबे के अयस्क और इसके अवयवों का आयात 44.6 फीसदी तक घट गया।