देश के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति गौतम अदाणी और उनका समूह एक बार फिर सुर्खियों में है। अमेरिका की एक अदालत ने गौतम अदाणी, उनके भतीजे सागर अदाणी और कई अन्य लोगों के खिलाफ घूसखोरी और निवेशकों को ठगने का मामला बनाया है। उसके बाद आज अदाणी समूह के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई। गुरुवार के कारोबारी सत्र के दौरान अदाणी समूह के शेयरों में 27 फीसदी तक गिरावट देखी गई। वहीं दूसरी ओर, इस डेवलपमेंट का असर अदाणी समूह की फंड जुटाने की योजनाओं पर भी पड़ा। समूह की कंपनी अदाणी ग्रीन एनर्जी ने करोड़ों डॉलर की फंड जुटाने की योजना रद्द करने का एलान किया।
अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी और 7 अन्य एक्जीक्यूटिव्स के ऊपर सिक्योरिटी फ्रॉड, वायर फ्रॉड और फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज एक्ट के उल्लंघन जैसे मामले बनाए गए हैं। प्रोसीक्यूटर्स का दावा है कि अदाणी और उनके सहयोगियों ने मिलकर घूसखोरी का पूरा जाल बुना। इसकी शुरुआत 2020 या 2021 में हुई और 2024 तक उसके तहत 250 मिलियन डॉलर घूस में बांटे गए।
अदालत के दस्तावेजों के अनुसार, अदाणी ग्रीन एनर्जी और एज्योर पावर को भारत सरकार की ओर से दी जा रही अरबों डॉलर की सौर ऊर्जा परियोजना दिलाने के लिए घूसखोरी का यह जाल बुना गया। एज्योर पावर गुरुग्राम स्थित एक रीन्यूएबल एनर्जी कंपनी है। इस पूरे प्रकरण में नामित व्यक्तियों ने अमेरिका के सिक्योरिटी फ्रॉड पर रोकथाम के प्रावधानों का उल्लंघन किया। इस कारण अदाणी समेत अन्य नामित लोगों के ऊपर पेनल्टी से लेकर प्रतिबंध तक की सजा की मांग की गई है।
दस्तावेजों में बताया गया है कि अदाणी की कंपनियों को आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, जम्मू कश्मीर और ओडिशा जैसे राज्यों की सरकारी बिजली कंपनियों से ठेके मिले। ये ठेके पाने के लिए भी घूसखोरी का सहारा लिया गया। गौतम अदाणी के भतीजे सागर अदाणी खुद इस बात की निगरानी कर रहे थे कि किसे और कितनी रिश्वत दी जा रही है। सागर अदाणी इस बात का भी हिसाब रख रहे थे कि घूस के बदले संबंधित राज्य उनकी कंपनी से सोलर पावर की कितनी खरीदारी करने वाले हैं।
घूसखोरी को अंजाम भले ही भारत में दिया गया हो, लेकिन आरोप है कि उसमें इस्तेमाल हुए पैसे अमेरिका में जुटाए गए। अमेरिकी बाजार नियामक एसईसी का कहना है कि अदाणी समूह ने फंड जुटाने से पहले निवेशकों से घूसखोरी के पूरे मामले को छिपा लिया। निवेशकों को यह नहीं बताया गया कि अदाणी समूह की कंपनी को जो प्रमुख सौर ऊर्जा परियोजना मिली है, उसे रिश्वत के जरिए पाया गया है। इस तरह अदाणी ने अमेरिकी शेयर बाजार से पैसे जुटाने के लिए गलत दस्तावेज पेश किए और दावा किया। अदाणी समूह की कंपनियों ने अमेरिकी बाजार से 3 बिलियन डॉलर का फंड जुटाया था। अदाणी ग्रीन एनर्जी ने निवेशकों को भरोसा दिलाया था कि वह घूसखोरी के खिलाफ उच्च मानकों का पालन करती है।
अमेरिकी कोर्ट में जिन लोगों के खिलाफ मामले तय हुए हैं, उनमें गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के अलावा भी कई लोगों के नाम हैं। उनमें अदाणी समूह के कुछ पूर्व कार्यकारी जैसे विनीत जैन, रंजीत गुप्ता और रुपेश अग्रवाल शामिल हैं। उनके अलावा एज्योर पावर के डायरेक्टर सिरिल कैबेन्स का नाम भी शामिल है। वह कनाडा के पेंशन फंड सीडीपीक्यू के साथ जुड़े रह चुके हैं। फंड ने उन्हें 2023 में काम से निकाल दिया था। सिरिल कैबेन्स के साथ सौरभ अग्रवाल और दीपक मल्होत्रा के ऊपर फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज एक्ट के उल्लंघन का मामला बनाया गया है।
अदाणी एंटरप्राइजेज: -22.61%
मामला सामने आने के बाद उसका असर सिर्फ अदाणी समूह के शेयरों में गिरावट तक सीमित नहीं है। असर अदाणी समूह की कंपनियों के द्वारा फंड जुटाने की योजनाओं पर भी हो रहा है। अदाणी ग्रीन एनर्जी आज गुरुवार को अमेरिकी डॉलर वाले बॉन्ड के मार्फत 600 मिलियन डॉलर का बड़ा फंड जुटाने वाली थी। फंड जुटाने से ऐन पहले कोर्ट में मामला बनने की खबर आ गई। अब खबरों में ऐसा दावा किया जा रहा है कि अदाणी ग्रीन एनर्जी ने फंड जुटाने की यह योजना रद्द कर दी है।