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अक्षय ऊर्जा: मुकेश अंबानी से दोगुना निवेश करेगा अडाणी समूह, जानिए क्या है योजना

Wed, 22 Sep 2021 01:43 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

अडाणी समूह के चेयरमैन का कहना है कि दुनिया में कोई भी कंपनी उस स्तर पर अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में काम नहीं कर रही है, जिस स्तर पर उनका समूह कर रहा है।
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अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अरबपति उद्योगपति गौतम अडाणी ने मंगलवार को कहा कि उनका समूह अक्षय ऊर्जा उत्पादन और कलपुर्जों के निर्माण पर अगले 10 वर्षों में 20 अरब डॉलर (1.47 लाख करोड़ रुपये) खर्च करेगा। साथ ही दुनिया का सबसे सस्ता हरित (ग्रीन) इलेक्ट्रॉन भी बनाएगा। 

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जेपी मॉर्गन इंडिया इन्वेस्टर समिट में अडाणी ने कहा कि समूह अपनी अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता को चार वर्षों में बढ़ाकर तीन गुना करने और ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन में उतरने की तैयारी में है।

इसके अलावा, सभी डाटा सेंटर को अक्षय ऊर्जा से चलाने, 2025 तक अपने बंदरगाहों के कार्बन उत्सर्जन को शून्य करने और 2025 तक हरित प्रौद्योगिकियों में पूंजीगत व्यय का 75 फीसदी खर्च से ज्यादा खर्च करने की योजना है।
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उन्होंने कहा कि 20 अरब डॉलर का निवेश अक्षय ऊर्जा उत्पादन, कलपुर्जा निर्माण, ट्रांसमिशन और वितरण क्षेत्रों में किया जाएगा। अडाणी समूह की एकीकृत मूल्य शृंखला, हमारी क्षमता और अनुभव के चलते हम पूरी दुनिया में सबसे सस्ता हरित इलेक्ट्रॉन निर्माता बनने की राह पर हैं। 

समूह के पास 4,920 मेगावट की उत्पादन क्षमता
समूह के पास वर्तमान में 4,920 मेगावाट परिचालन अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता है, जबकि 5,124 मेगावाट निर्माणाधीन है। इसके अलावा, 9,750 मेगावाट की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं और 4500 मेगावाट क्षमता के लिए ठेके हासिल करने की कोशिश चल रही है।

अंबानी को पीछे छोड़ा
इस घोषणा के साथ ही अडाणी ने देश के सबसे अमीर शख्स मुकेश अंबानी को पीछे छोड़ दिया है। इससे एक सप्ताह पहले रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन ने स्वच्छ ऊर्जा और हाइड्रोजन ईंधन पर तीन वर्षों में 10 अरब डॉलर (75,000 करोड़ रुपये) खर्च करने की घोषणा की थी।

पेट्रोकेमिकल दिग्गज अंबानी की अक्षय ऊर्जा में निवेश की 24 जून की घोषणा को देश के दूसरे सबसे अमीर शख्स अडाणी के साथ सीधी प्रतिस्पर्धा के रूप में देखा जा रहा है।

अडाणी समूह की कई वर्षों से अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति है। इस महीने अंबानी ने कहा था कि अक्षय ऊर्जा से एक डॉलर प्रति किलोग्राम के खर्च पर हाइड्रोजन बनाई जा सकती है, जिसमें कार्बन उत्सर्जन नहीं होता है। इसे उद्योग और एवं वाहन क्षेत्र में ईंधन के रूप में उपयोग किया जा सकता है।

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