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CMIE: अप्रैल-दिसंबर में नया निवेश छह वर्षों में सबसे कम, चुनाव के कारण कंपनियों ने अपनाई इंतजार करो की रणनीति

Wed, 03 Jan 2024 05:30 AM IST
जलज मिश्रा अजीत सिंह, नई दिल्ली

सार

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-दिसंबर, 2019 में 13.80 लाख करोड़ रुपये की घोषणा हुई थी। 2018 में यह 13.44 लाख करोड़ रुपये रहा था। 2021 में 13.22 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा हुई। 2022 में सबसे अधिक 21.90 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा हुई थी।
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investment - फोटो : istock
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विस्तार
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देश में नया निवेश पिछले वित्त वर्ष अप्रैल-दिसंबर में छह वर्षों में सबसे कम रहा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान 10.80 लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा हुई है। हालांकि, 2020 में अप्रैल-दिसंबर में 5.94 लाख करोड़ के नए निवेश की घोषणा हुई थी। उस दौरान कोरोना से लॉकडाउन होने से निवेश में कमी आई थी।
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आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-दिसंबर, 2019 में 13.80 लाख करोड़ रुपये की घोषणा हुई थी। 2018 में यह 13.44 लाख करोड़ रुपये रहा था। 2021 में 13.22 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा हुई। 2022 में सबसे अधिक 21.90 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा हुई थी। पिछले साल दिसंबर तिमाही में केवल 2.15 लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा हुई थी। आंकड़ों के मुताबिक, पिछली दस तिमाहियों की तुलना में दिसंबर, 2023 में निवेश सबसे कम रहा है। इससे पहले सबसे कम निवेश जून, 2019 में रहा था, जो 2.08 लाख करोड़ रुपये रहा था।

निजी क्षेत्र करेगा ज्यादा खर्च
आंकड़ों के मुताबिक, निजी क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों से लगातार कम निवेश कर रहा था। लेकिन अब अप्रैल-दिसंबर में इस क्षेत्र ने सबसे ज्यादा निवेश की घोषणा की है, जो 8.50 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा होगा। सरकार इसी दौरान 2.24 लाख करोड़ रुपये खर्च कर सकती है।
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गिरावट के तीन प्रमुख कारण
  • पहला कारण इस साल होने वाला आम चुनाव है। इसलिए कंपनियां देखो और इंतजार करो की रणनीति अपना रही हैं। हर बार चुनाव से पहले ऐसा ही रुझान रहा है। अगर सरकार बदलती है तो फिर नीतियों में बदलाव से कंपनियों को नुकसान हो सकता है। इसलिए चुनाव के बाद कंपनियां निवेश को बढ़ा सकती हैं। अगर भाजपा की तीसरी बार सरकार आती है तो आर्थिक सुधारों का कार्यक्रम और तेजी से आगे बढ़ेगा जिससे कंपनियां ज्यादा निवेश कर सकती हैं।
  • दूसरा कारण ऊंची ब्याज दरें हैं। लगाातार बढ़ रही महंगाई को रोकने के लिए आरबीआई ने 2022 में दरों में 2.5 फीसदी का इजाफा किया था, जिससे कंपनियों के निवेश की रफ्तार धीमी हो गई।
  • तीसरा कारण ज्यादातर क्षेत्रों में क्षमता अपने शीर्ष पर है, जिससे निवेश की जरूरत नहीं है। अधिकतर क्षेत्र की कंपनियों की उत्पादन या वितरण क्षमता अपने शीर्ष पर पहुंच चुकी हैं।
सेवा क्षेत्र में सर्वाधिक 49 फीसदी की घोषणा
सर्वाधिक 49% निवेश की घोषणा सेवा क्षेत्र में रही है। इसमें भी 94% नए विमानों के खरीदने पर खर्च होंगे, जो 4.96 लाख करोड़ होगा। वित्त क्षेत्र को छोड़कर सेवा में कुल 5.30 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा हुई है। विनिर्माण में 28 फीसदी निवेश की घोषणा की गई है। केमिकल और इसके उत्पादों के क्षेत्र में 1.28 लाख करोड़ और इलेक्ट्रिसिटी में 2.27 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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