सरकार ने बताया कि आधार से अब तक 32.71 करोड़ पैन कार्ड लिंक हो चुके हैं। 29 जून 2020 तक 50.95 करोड़ पैन कार्ड अलॉट किए गए। यानी अब भी 18 करोड़ से ज्यादा पैन कार्ड आधार से लिंक नहीं हुए हैं। मालूम हो कि सरकार द्वारा आधार को पैन कार्ड से जोड़ने की तारीख बढ़ाकर 31 मार्च 2021 तय की गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अगर आपने 31 मार्च तक यह काम नहीं किया, तो आयकर विभाग कार्रवाई कर सकता है। आयकर विभाग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंश से लैस है, इसलिए कई पैन का उपयोग करके ज्यादा मूल्य के लेनदेन का संचालन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तैयार है।
मामले में सूत्रों ने कहा कि सरकार बेईमान लोगों के खर्चे के पैटर्न को ट्रैक करने के लिए ज्यादा मूल्य के लेनदेन की सूची का विस्तार कर सकती है। जो लोग बड़ी रकम खर्च करते हैं लेकिन अपनी आय को कम बताते हुए टैक्स देने से बचते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
वित्त वर्ष 2016-17 में 29.44 करोड़ पैन कार्ड अलॉट किए गए थे, 2017-18 में 37.9 करोड़ और 2018-19 में 44.57 करोड़ पैन कार्ड अलॉट किए गए थे।
एक अधिकारी ने कहा कि, 'यह हैरान करने वाली बात है कि 130 करोड़ की आबादी में सिर्फ 1.5 करोड़ लोग आयकर में योगदान करते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस ओर इशारा किया था। उपलब्ध आंकड़ों का सुझाव है कि कर आधार का विस्तार करने की तत्काल आवश्यकता है।'
इस संदर्भ में अधिकारी का कहना है कि जून तक देश में 50.95 करोड़ पैन कार्डधारक हैं, लेकिन उनमें से केवल 6.48 करोड़ आयकर रिटर्न दाखिल करते हैं और केवल 1.5 करोड़ वास्तव में आयकर का भुगतान करते हैं। करीब 4.98 करोड़ लोग आईटीआर फाइल करते हैं। लेकिन वे या तो शून्य कर देयता दिखाते हैं या आईटीआर के माध्यम से भुगतान किए गए कर की पूरी राशि का दावा करते हैं।
सरकार ज्यादा मूल्य लेनदेन की सूची का विस्तार कर सकती है। इसमें सालाना एक लाख रुपये से अधिक के शिक्षा शुल्क का भुगतान, सालाना एक लाख रुपये से ज्यादा की बिजली की खपत, व्यापारी वर्ग में घरेलू हवाई यात्रा, एक लाख रुपये से ज्यादा के आभूषण या वैध वस्तुओं की खरीद, भुगतान शामिल हो सकते हैं। साथ ही सालाना 20,000 रुपये से अधिक संपत्ति कर, 50,000 रुपये से ज्यादा का जीवन बीमा प्रीमियम और 20,000 रुपये से अधिक का स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम को भी शामिल किया जा सकता है।
चालू वित्त वर्ष में 24.64 लाख करदाताओं को इतना मिला रिफंड
आयकर विभाग ने शु्क्रवार को कहा कि उसने चालू वित्त वर्ष में अभी तक 24 लाख से अधिक करदाताओं को 88,652 करोड़ रुपये से अधिक के रिफंड जारी किए हैं। इसमें 23.05 लाख करदाताओं को जारी किया गया 28,180 करोड़ रुपये का व्यक्तिगत आयकर (पीआईटी) और 1.58 लाख से अधिक करदाताओं को जारी किया गया 60,472 करोड़ रुपये का कॉरपोरेट कर शामिल है।
आयकर विभाग ने ट्वीट किया कि, 'सीबीडीटी ने एक अप्रैल 2020 से अब तक 24.64 लाख से अधिक करदाताओं को 88,652 करोड़ रुपये से अधिक के रिफंड जारी किए हैं। कुल 23,05,726 मामलों में 28,180 करोड़ रुपये के आयकर रिफंड जारी किए गए हैं और 1,58,280 मामलों में 60,472 करोड़ रुपये के कॉरपोरेट रिफंड जारी किए गए हैं।'
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) व्यक्तिगत आयकर और कॉरपोरेट कर व्यवस्था का संचालन करता है।