स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर में सुधार के आधार पर मापी गई बहुआयामी गरीबी से मार्च 2021 में समाप्त पांच वर्षों में 13.5 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में सबसे तेजी से गरीबी में कमी दर्ज की गई है। नीति आयोग की सोमवार को आई एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) के दूसरे संस्करण के अनुसार, 2015-16 में बहुआयामी गरीबी का आंकड़ा 24.85 प्रतिशत था जो 9.89 प्रतिशत घटकर 2019-2021 में 14.96 प्रतिशत रह गई।
ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में यूएनडीपी और ओपीएचआई की ओर से जारी वैश्विक एमपीआई के नवीनतम अपडेट के अनुसार, 2005/2006 से 2019/2021 तक केवल 15 वर्षों के भीतर भारत में कुल 41.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। नीति आयोग की रिपोर्ट में गरीबी में गिरावट का श्रेय स्वच्छता, पोषण, खाना पकाने के ईंधन, वित्तीय समावेशन, पेयजल और बिजली तक पहुंच में सुधार के लिए सरकार की ओर से किए गए प्रयासों को दिया गया है। एमपीआई के सभी 12 मापदंडों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पोषण अभियान और एनीमिया मुक्त भारत जैसी योजनाओं ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में वंचितों को कम करने में योगदान दिया है। स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी पहलों ने देश भर में स्वच्छता में सुधार किया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के माध्यम से सब्सिडी वाले खाना पकाने के ईंधन के प्रावधान ने जीवन को सकारात्मक रूप से बदला है, जिसमें खाना पकाने के ईंधन के अभाव में 14.6 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार सौभाग्य, प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई), प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) और समग्र शिक्षा जैसी पहलों ने भी देश में बहुआयामी गरीबी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण [एनएफएचएस-5 (2019-21)] के आधार पर राष्ट्रीय एमपीआई का यह दूसरा संस्करण दो सर्वेक्षणों एनएफएचएस-4 (2015-16) और एनएफएचएस-5 (2019-21) के बीच बहुआयामी गरीबी को कम करने में भारत की प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है। यह रिपोर्ट नवंबर 2021 में लॉन्च की गई भारत के राष्ट्रीय एमपीआई की बेसलाइन रिपोर्ट पर आधारित है।
निर्यात तैयारी सूचकांक में तमिलनाडु शीर्ष पर
नीति आयोग के निर्यात तैयारी सूचकांक 2022 में महाराष्ट्र और गुजरात को पीछे छोड़कर तमिलनाडु शीर्ष राज्य बन गया है। सूचकांक का मकसद राज्यों की निर्यात क्षमता और प्रदर्शन के लिहाज से उनकी तैयारी का आकलन करना है। तमिलनाडु ने कुल 80.89 अंक के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। महाराष्ट्र 78.20 अंक के साथ दूसरे और कर्नाटक 76.36 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा। पिछले दो संस्करणों में शीर्ष पर रहा गुजरात इस बार 73.22 अंक के साथ चौथे स्थान पर चला गया।
तटीय राज्यों की रैंकिंग में इसके बाद आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और केरल का स्थान रहा।