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Poverty Report: सरकार की पहल से 13.5 करोड़ लोग पांच साल में गरीबी से मुक्त हुए, नीति आयोग की रिपोर्ट में दावा

Mon, 17 Jul 2023 06:43 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Poverty Report: ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी में सबसे तेजी से गिरावट देखी गई और यह 32.59 प्रतिशत से घटकर 19.28 प्रतिशत रह गई। वहीं, शहरी क्षेत्रों में गरीबी 8.65 प्रतिशत से घटकर 5.27 प्रतिशत हो गई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : i stock
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विस्तार
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स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर में सुधार के आधार पर मापी गई बहुआयामी गरीबी से मार्च 2021 में समाप्त पांच वर्षों में 13.5 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं। इनमें उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में सबसे तेजी से गरीबी में कमी दर्ज की गई है। नीति आयोग की सोमवार को आई एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (एमपीआई) के दूसरे संस्करण के अनुसार, 2015-16 में बहुआयामी गरीबी का आंकड़ा 24.85 प्रतिशत था जो 9.89 प्रतिशत घटकर 2019-2021 में 14.96 प्रतिशत रह गई। 

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ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी में सबसे तेजी से गिरावट देखी गई और यह 32.59 प्रतिशत से घटकर 19.28 प्रतिशत रह गई। वहीं, शहरी क्षेत्रों में गरीबी 8.65 प्रतिशत से घटकर 5.27 प्रतिशत हो गई। नीति आयोग की उपाध्यक्ष सुमन बेरी की ओर से जारी रिपोर्ट 'राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक : प्रगति समीक्षा 2023' में कहा गया है, ''2015-16 और 2019-21 के बीच रिकॉर्ड 13.5 करोड़ लोग बहुआयामी निर्धनता से बाहर निकले।

राष्ट्रीय एमपीआई स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर के तीन समान रूप से भारित आयामों में एक साथ अभावों को मापता है जो 12 एसडीजी-संरेखित संकेतकों से दर्शाया गया है। इनमें पोषण, बाल और किशोर मृत्यु दर, मातृ स्वास्थ्य, स्कूली शिक्षा के वर्ष, स्कूल में उपस्थिति, खाना पकाने का ईंधन, स्वच्छता, पेयजल, बिजली, आवास, संपत्ति और बैंक खाते शामिल हैं। नीति आयोग ने कहा कि उक्त पांच वर्षों की अवधि के दौरान सभी 21 संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है, रिपोर्ट अपने तकनीकी भागीदारों - ऑक्सफोर्ड गरीबी और मानव विकास पहल (ओपीएचआई) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की ओर से विकसित अल्किरे-फोस्टर पद्धति का पालन करती है। 

एमपीआई के सभी 12 मापदंडों में उल्लेखनीय सुधार

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में यूएनडीपी और ओपीएचआई की ओर से जारी वैश्विक एमपीआई के नवीनतम अपडेट के अनुसार, 2005/2006 से 2019/2021 तक केवल 15 वर्षों के भीतर भारत में कुल 41.5 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। नीति आयोग की रिपोर्ट में गरीबी में गिरावट का श्रेय स्वच्छता, पोषण, खाना पकाने के ईंधन, वित्तीय समावेशन, पेयजल और बिजली तक पहुंच में सुधार के लिए सरकार की ओर से किए गए प्रयासों को दिया गया है। एमपीआई के सभी 12 मापदंडों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

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रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुआयामी गरीबों के अनुपात में सबसे तेजी से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा और राजस्थान में कमी आई। 2015-16 और 2019-21 के बीच, एमपीआई मूल्य 0.117 से घटकर लगभग आधा यानी 0.066 हो गया और गरीबी की तीव्रता 47 प्रतिशत से घटकर 44 प्रतिशत रह गई। नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बीवीआर सुब्रमण्यम ने कहा कि भारत एसडीजी लक्ष्य 1.1 (बहुआयामी गरीबी को कम से कम आधा करने) को 2030 की निर्धारित समयसीमा से बहुत पहले हासिल करने की राह पर है। 

खाना पकाने के स्वच्छ ईंधन की उपलब्धता से आया सकारात्मक बदलाव

रिपोर्ट में कहा गया है कि पोषण अभियान और एनीमिया मुक्त भारत जैसी योजनाओं ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में वंचितों को कम करने में योगदान दिया है। स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसी पहलों ने देश भर में स्वच्छता में सुधार किया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के माध्यम से सब्सिडी वाले खाना पकाने के ईंधन के प्रावधान ने जीवन को सकारात्मक रूप से बदला है, जिसमें खाना पकाने के ईंधन के अभाव में 14.6 प्रतिशत अंक का सुधार हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार सौभाग्य, प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई), प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) और समग्र शिक्षा जैसी पहलों ने भी देश में बहुआयामी गरीबी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

नवीनतम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण [एनएफएचएस-5 (2019-21)] के आधार पर राष्ट्रीय एमपीआई का यह दूसरा संस्करण दो सर्वेक्षणों एनएफएचएस-4 (2015-16) और एनएफएचएस-5 (2019-21) के बीच बहुआयामी गरीबी को कम करने में भारत की प्रगति का प्रतिनिधित्व करता है। यह रिपोर्ट नवंबर 2021 में लॉन्च की गई भारत के राष्ट्रीय एमपीआई की बेसलाइन रिपोर्ट पर आधारित है।

निर्यात तैयारी सूचकांक में तमिलनाडु शीर्ष पर
नीति आयोग के निर्यात तैयारी सूचकांक 2022 में महाराष्ट्र और गुजरात को पीछे छोड़कर तमिलनाडु शीर्ष राज्य बन गया है। सूचकांक का मकसद राज्यों की निर्यात क्षमता और प्रदर्शन के लिहाज से उनकी तैयारी का आकलन करना है। तमिलनाडु ने कुल 80.89 अंक के साथ शीर्ष स्थान हासिल किया। महाराष्ट्र 78.20 अंक के साथ दूसरे और कर्नाटक 76.36 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहा। पिछले दो संस्करणों में शीर्ष पर रहा गुजरात इस बार 73.22 अंक के साथ चौथे स्थान पर चला गया। 
तटीय राज्यों की रैंकिंग में इसके बाद आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और केरल का स्थान रहा। 

  • पहाड़ी राज्यों में उत्तराखंड शीर्ष स्थान पर है। इसके बाद हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, त्रिपुरा, सिक्किम, नागालैंड, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम का स्थान है।
  • भूमि से घिरे राज्यों में हरियाणा शीर्ष पर है। इसके बाद तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, पंजाब, मध्य प्रदेश और राजस्थान का स्थान रहा।
  • केंद्र शासित प्रदेशों और छोटे राज्यों की श्रेणी में गोवा को पहला स्थान मिला। इसके बाद जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, अंडमान और निकोबार और लद्दाख का स्थान था।
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