केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को आम बजट में पांच लाख रुपये तक इनकम टैक्स की छूट की घोषणा कर दी। हालांकि इससे पहले कि आम जनता इसे लेकर खुश हो पाती, उससे पहले ही इसका पेंच सामने आ गया।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि अगर आपको टैक्स में छूट चाहिए, तो कई तरह के निवेश के जरिए मिलने वाली छूट को छोड़ने के लिए तैयार रहना होगा। अगर आप ऐसा नहीं चाहते हैं, तो पुरानी व्यवस्था के तहत छूट के फायदे उठा सकते हैं, लेकिन आपको टैक्स भी पुरानी दरों से देना पड़ेगा।
विशेषज्ञों की मानें तो इस विकल्प के साथ केंद्र सरकार ने स्पष्ट संदेश दे दिया है, 'या तो भविष्य की योजना बना लो या फिर आज के बारे में सोच लो।' इसके लिए सरकार ने करदाता को दो तरह के विकल्प दिए हैं। वो जो चाहे, वो चुन ले। अगर किसी को पुराने स्लैब से फायदा हो रहा है तो वो उसपर कायम रह सकता है। और अगर नई टैक्स से किसी को लाभ होता है, तो वो वह चुन सकता है।
ये है मौजूदा व्यवस्था
- केंद्र सरकार के मुताबिक वर्तमान में करदाता को 120 के करीब छूट मिलती हैं।
- अगर आप पुराने स्लैब के साथ जाते हैं, तो इन छूटों का फायदा उठा सकते है।
- पुरानी व्यवस्था के तहत एचआरए, इंश्योरेंस प्रीमियम, होम लोन के ब्याज समेत कई छूट मिलती हैं।
- कई अन्य पेंशन फंड, आर्टिकल 80 के तहत भी छूट आपको मिलती है।
मौजूदा व्यवस्था के तहत स्लैब
- अगर आप पुरानी व्यवस्था के साथ रहते हैं, तो पुराने स्लैब के मुताबिक आपको टैक्स देना होगा।
- मतलब 5 लाख रुपये तक आप टैक्स रिबेट ले सकते हैं।
- 5 से 10 लाख तक आमदनी पर 20 फीसदी टैक्स और इससे ज्यादा पर 30 प्रतिशत टैक्स देना होगा।
अब समझें नई व्यवस्था