घर की रसोई चलाना एक बार फिर आम लोगों के लिए भारी पड़ने लगा है। पिछले कुछ दिनों में अरहर दाल, खाद्य तेल, आलू और प्याज जैसी जरूरी चीजों के खुदरा दामों में भारी बढ़त देखने को मिली है। रसोई की मुख्य आधार माने जानी वाली हरी सब्जियों के तेवर भी कड़े बने हुए हैं।
उपभोक्ता मामले विभाग के अनुसार, दलहन वर्ग में अरहर दाल के खुदरा भाव 124.23 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए, जो एक साल पहले 113.66 रुपये प्रति किलो थे। चना, उड़द, मूंग और मसूर दालों के खुदरा दाम में भी वृद्धि हुई है। सब्जियों के मोर्चे पर आलू का भाव पिछले साल की तुलना में कम बढ़ा है, लेकिन प्याज और टमाटर के भाव ने इस बार उपभोक्ताओं के पसीने छुड़ा दिए हैं।
प्याज का औसत खुदरा मूल्य 20 सितंबर को 54.23 रुपये प्रति किलो दर्ज किया गया। यह पिछले साल समान अवधि में 25.97 रुपये प्रति किलो था। टमाटर का खुदरा भाव 39.16 रुपये प्रति किलो रहा, जो एक साल पहले 36.48 रुपये प्रति किलो था। आलू जैसी सब्जी 22 रुपये के ऊपर है, इसका असर जेब पर काफी भारी पड़ रहा है।
तेलों का औसत खुदरा मूल्य
| तेल |
वर्तमान भाव |
एक साल पहले |
वृद्धि |
| मूंगफली |
208.44 |
186.93 |
21.51 |
| सरसों |
201.02 |
188.80 |
12.22 |
| वनस्पति |
167.16 |
156.74 |
10.42 |
| सोया तेल |
166.73 |
147.14 |
19.52 |
| सूरजमुखी |
192.56 |
161.40 |
31.16 |
| पाम तेल |
151.40 |
132.98 |
18.42 |
खाद्य तेल साल भर में 31 रुपये महंगे
पिछले एक साल में खाद्य तेलों की औसत खुदरा कीमतें 31 रुपये प्रति किलो तक बढ़ चुकी हैं। मूंगफली तेल 186.93 रुपये से बढ़कर 208.44 रुपये और सरसों तेल 188.80 रुपये से बढ़कर 201.02 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है।
महंगाई के पीछे छिपे हैं कई अहम कारण
कमजोर मानसून का साया...
- 17 सितंबर तक बारिश में करीब 15 फीसदी तक की कमी दर्ज की गई है। मुख्य खरीफ उत्पादक क्षेत्रों में बारिश की कमी धान और तिलहन की पैदावार को कमजोर कर रहा है।
पाम तेल पर बायोफ्यूल की मार...
- भारत अपनी सालाना वनस्पति तेल की जरूरत का 60 फीसदी हिस्सा आयात करता है, जिसमें पाम तेल की हिस्सेदारी 50-60 फीसदी है। प्रमुख निर्यातक देश इंडोनेशिया और मलेशिया घरेलू पाम तेल का एक बड़ा हिस्सा बायोफ्यूल उत्पादन की तरफ मोड़ रहे हैं, जिससे वैश्विक बाजार में पाम तेल महंगा हो गया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध और काला सागर का संकट
भारत अपनी सूरजमुखी तेल की अधिकांश आपूर्ति रूस और यूक्रेन से लेता है। लेकिन युद्ध के बढ़ने और काला सागर मार्ग पर लॉजिस्टिक्स बाधाओं के कारण वैश्विक आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत में सूरजमुखी तेल के दामों पर साफ दिख रहा है।