भारत और चीन अब भी कर रहे हैं रूस से आयात
इस बीच, भारत और चीन का रूस से आयात जारी है। रूसी कंपनियों पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद छूट के चक्कर में भारत ने फरवरी अंत में कम-से-कम 1.3 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदा है। 2021 में उसने 1.6 करोड़ बैरल तेल खरीदा था।
- हिंदुस्तान पेट्रोलियम : भारतीय रिफाइनरी कंपनी ने मई डिलीवरी के लिए 20 लाख बैरल यूराल (कच्चा तेल) का अनुबंध किया है।
- इंडियन ऑयल : 23 मार्च को शीर्ष घरेलू कंपनी ने मई डिलीवरी के लिए 30 लाख बैरल यूराल खरीदे। 24 फरवरी को यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से यह दूसरी खरीद है।
बफर पूंजी की अभी जरूरत नहीं : आरबीआई
आरबीआई ने मंगलवार को कहा कि मौजूदा उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए बनाई गई पूंजी व्यवस्था यानी ‘बफर’ पूंजी का अभी जरूरत नहीं है। इसलिए अभी इसका इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। केंद्रीय बैंक ने कहा कि प्रति चक्रीय बफर पूंजी (सीसीवाईबी) संकेतकों की समीक्षा और विश्लेषण के आधार पर यह निर्णय किया गया है। सीसीवाईबी व्यवस्था के तहत बैंकों के लिए जरूरी है कि वे अच्छे समय में पूंजी बफर बनाएं, जिसका उपयोग कठिन समय में हो।
महंगाई के बीच खाद्य तेल की खुदरा कीमतें न बढ़ाएं सदस्य : एसईए
खाद्य तेल उद्योग के प्रमुख संगठन साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (एसईए) ने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए मंगलवार को अपने सदस्यों से अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) नहीं बढ़ाने की अपील की है। एसईए के अध्यक्ष अतुल चतुर्वेदी ने सदस्यों को लिखे पत्र में कहा कि देश खाद्य तेलों की ऊंची कीमतों से जूझ रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध से स्थिति और खराब हो गई है। आम जनता महंगाई से जूझ रही है। ऐसे में दाम बढ़ाने का फैसला उचित नहीं है।