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यह 8 कारण जिनकी वजह से सेंसेक्स में दिखी बढ़ोतरी, रिलायंस का मार्केट कैप 100 बिलियन के पार

Thu, 12 Jul 2018 05:24 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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शेयर बाजार में गुरुवार को बहुत अच्छी शुरुआत देखने को मिली और सेंसेक्स दिन के कारोबार में 400 अंक तक उछल गया। वहीं निफ्टी भी 11 हजार के पार चला गया। इस तेजी में सबसे बड़ा भागीदार रिलायंस इंडस्ट्रीज है, जिसकी वजह से शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली।

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निफ्टी भी 23 जनवरी के बाद फिर 11,000 के ऊपर निकला है। सेंसेक्स और निफ्टी में 1 फीसदी की मजबूती के साथ कारोबार देखने को मिल रहा है। सेंसेक्स ने 36,699.5 के नए रिकॉर्ड उच्चतम स्तर को छुआ है। वहीं आज निफ्टी 11,078.3 तक पहुंचा है। इन 10 कारणों से शेयर बाजार में तेजी बनी हुई है। 

बाजार का स्टार है रिलांयस इंडस्ट्रीज
आज बाजार का स्टार रिलायंस इंडस्ट्रीज है। बाजार की तेजी में रिलायंस इंडस्ट्रीज का सबसे बड़ा योगदान है। रिलायंस इंडस्ट्रीज 100 अरब डॉलर की कंपनी बन गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप करीब 7 लाख करोड़ रुपये के करीब पहुंच गया है। एजीएम के बाद लगातार ब्रोकरेज हाउस का भरोसा बढ़ता जा रहा है।
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कच्चे तेल के दामों में बढ़ी गिरावट
कच्चे तेल में बुधवार को एक दिन के कारोबार में पिछले दो सालों में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। अफ्रीकी देश लीबिया द्वारा अपने बंदरगाह को तेल के लिए खोलने की सूचना देने से कच्चा तेल 5.46 डॉलर गिर कर 73.40 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। 9 फरवरी 2016 के बाद यह सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली। 

फ्रांस को विश्व बैंक रैंकिंग में पछाड़ना
बुधवार को विश्व बैंक ने जीडीपी के आधार पर विश्व के टॉप 10 देशों की सूची जारी की थी, जिसमें भारत ने फ्रांस और ब्रिटेन जैसे देशों को पछाड़ दिया था। भारत जीएसटी की वजह से विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। 

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चीन की मुद्रा में गिरावट
चीन की मुद्रा युआन में व्यापार युद्ध की वजह से गिरावट देखने को मिली। डॉलर के मुकाबले चीन की मुद्रा काफी गिर गई है, जिसका असर शेयर बाजार पर पड़ा। अब चीन अमेरिका के बजाए भारत से बिजनेस बढ़ाने में ज्यादा रूचि दिखा सकता है। इससे भी मार्केट में तेजी कायम है। 

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कंपनियों के आएंगे अच्छे नतीजे

वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही के नतीजे आने शुरू हो गए हैं। बाजार को उम्मीद है कि सभी लिस्टेड कंपनियां इस बार बढ़िया नतीजे आएंगे। 

जीएसटी ने बदली दुनिया की सोच
जीएसटी, बैंक्रप्सी कोड, ऑनलाइन ईएसआइसी और ईपीएफओ पंजीकरण जैसे कदमों कारोबारी माहौल को और भी बेहतर किया है। खास तौर पर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ यानि GST ने सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया है। व्यापारियों और उपभोक्ताओं को दर्जनों करों के मकड़जाल से मुक्त कर एक कर के दायरे में लाया गया।

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कैशलेस अभियान से आई पारदर्शिता
रिजर्व बैंक के अनुसार 4 अगस्त तक लोगों के पास 14,75,400 करोड़ रुपये की करेंसी सर्कुलेशन में थे। जो वार्षिक आधार पर 1,89,200 करोड़ रुपये की कमी दिखाती है। जबकि वार्षिक आधार पर पिछले साल 2,37,850 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई थी।

विदेशी मुद्रा भंडार 88 करोड़ डॉलर बढ़कर हुआ 413 अरब डॉलर
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार आठ जून को समाप्त सप्ताह में 87.95 करोड़ डॉलर बढ़कर 413 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी आंकड़े के अनुसार, 08 जून को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 87.54 करोड़ डॉलर बढ़कर 388.39 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस दौरान स्वर्ण भंडार 21.19 अरब डॉलर पर स्थिर रहा। 
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