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इस साल सस्ती मिलेगी चीनी, जल्द पेराई से 79 फीसदी बढ़ा उत्पादन

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 21 Nov 2017 02:13 PM IST
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डेमो - फोटो : demo pic
चालू चीनी सत्र 2017-18 में 15 नवंबर तक देश के चीनी उत्पादन ने 13.73 लाख टन के आंकड़े को छू दिया है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 79 फीसदी अधिक है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने सोमवार को यह जानकारी दी। इस वजह से चीनी के दाम इस साल घट सकते हैं। अभी घरेलू बाजार में खुली चीनी 45 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है।

इस्मा ने 2017-18 चीनी सत्र में 2.51 करोड़ टन चीनी उत्पादन की संभावना जताई है, जो पिछले चीनी सत्र (अक्तूबर-सितंबर) में 2.02 करोड़ टन था। एक बयान में इस्मा ने कहा कि गन्ने की पेराई काफी पहले शुरू होने की वजह से इतने कम दिनों में उच्च उत्पादन हुआ है।


पढ़ें- फीकी हुई सरकारी चीनी, गरीबों पर तीन गुना मार

इस सत्र में 15 नवंबर तक लगभग 313 चीनी मिलों का संचालन हो रहा था, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 222 चीनी मिलों का ही संचालन हो रहा था।

स्टॉक होल्डिंग लिमिट हटाने की मांग 
इस्मा ने कहा कि चूंकि इस सत्र में अधिशेष उत्पादन की उम्मीद है, इसलिए उसने सरकार से चीनी के व्यापारियों पर लगाई गई स्टॉक होल्डिंग लिमिट को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। बयान के मुताबिक, अधिशेष चीनी की उपलब्धता व उम्मीद से कम चीनी के उठान के साथ व्यापारियों पर स्टॉक होल्डिंग लिमिट का बरकरार रहना खरीद हितों को प्रभावित कर रहा है। य

ह नकदी प्रभाव को प्रभावित करेगा, जो चीनी उत्पादकों के हितों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है और बहुत जल्द ही गन्ना किसानों को भुगतान की उनकी क्षमता पर असर डाल सकता है। सरकार ने दो महीने के लिए 31 दिसंबर तक व्यापारियों पर स्टॉक होल्डिंग लिमिट लगा रखी है। 
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चालू चीनी सत्र 2017-18 में 15 नवंबर तक देश के चीनी उत्पादन ने 13.73 लाख टन के आंकड़े को छू दिया है, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 79 फीसदी अधिक है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) ने सोमवार को यह जानकारी दी। इस वजह से चीनी के दाम इस साल घट सकते हैं। अभी घरेलू बाजार में खुली चीनी 45 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बिक रही है।

इस्मा ने 2017-18 चीनी सत्र में 2.51 करोड़ टन चीनी उत्पादन की संभावना जताई है, जो पिछले चीनी सत्र (अक्तूबर-सितंबर) में 2.02 करोड़ टन था। एक बयान में इस्मा ने कहा कि गन्ने की पेराई काफी पहले शुरू होने की वजह से इतने कम दिनों में उच्च उत्पादन हुआ है।

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इस सत्र में 15 नवंबर तक लगभग 313 चीनी मिलों का संचालन हो रहा था, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 222 चीनी मिलों का ही संचालन हो रहा था।

स्टॉक होल्डिंग लिमिट हटाने की मांग 
इस्मा ने कहा कि चूंकि इस सत्र में अधिशेष उत्पादन की उम्मीद है, इसलिए उसने सरकार से चीनी के व्यापारियों पर लगाई गई स्टॉक होल्डिंग लिमिट को तत्काल प्रभाव से वापस लेने की मांग की है। बयान के मुताबिक, अधिशेष चीनी की उपलब्धता व उम्मीद से कम चीनी के उठान के साथ व्यापारियों पर स्टॉक होल्डिंग लिमिट का बरकरार रहना खरीद हितों को प्रभावित कर रहा है। य

ह नकदी प्रभाव को प्रभावित करेगा, जो चीनी उत्पादकों के हितों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है और बहुत जल्द ही गन्ना किसानों को भुगतान की उनकी क्षमता पर असर डाल सकता है। सरकार ने दो महीने के लिए 31 दिसंबर तक व्यापारियों पर स्टॉक होल्डिंग लिमिट लगा रखी है। 

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र में भारी उत्पादन

इनमें से उत्तर प्रदेश के चीनी मिलों ने 5.67 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह आंकड़ा 1.92 लाख टन था। इस्मा ने कहा कि चीनी के उच्च उत्पादन में उत्तर प्रदेश तथा महाराष्ट्र के चीनी मिलों का महत्वपूर्ण योगदान है।

कर्नाटक में 15 नवंबर तक चीनी का उत्पादन पिछले साल की समान अवधि में हुए उत्पादन के ही बराबर है। अन्य राज्यों में भी चीनी के उत्पादन की स्थिति पिछले साल के ही बराबर है।

संगठन के मुताबिक, पिछले दो महीने के दौरान मिलों से चीनी के उठान में कमी आई है। साल 2017-18 के दौरान उच्च उत्पादन के मद्देनजर चीनी की बिक्री में सुधार की जरूरत है, ताकि बेहतर नकद प्रवाह हो और चीनी की कीमतें स्थिर रहें। 
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