बाजार नियामक सेबी ने प्रतिभूति बाजार में साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने और इससे संबंधित घटनाओं पर नजर रखने के लिए एक तीन-स्तरीय प्रणाली की योजना तैयार की है। साथ ही उसकी योजना विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए डाटा एनालिटिक्स और नई पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों को बहाल करने की है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 2018-19 की अपनी सालाना रिपोर्ट में कहा कि वह नियमन के दायरे में आने वाली उन संस्थाओं के लिए एक साइबर सुरक्षा एवं अनुपालन रिपोर्टिंग प्रणाली बनाना चाहती है, जो साइबर सुरक्षा से संबंधित समस्याओं से निपटने के लिए सरकार के साथ अन्य राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय नियामकों का सहयोग करेंगी। इसके अलावा साइबर सुरक्षा की तैयारियों और बाजार बुनियादी संरचना संस्थानों (एमआईआई) की साइबर जोखिमों से निपटने की क्षमता का आकलन करने के लिए साइबर क्षमता सूचकांक भी तैयार किया जाएगा। इसमें स्टॉक एक्सचेंज और क्लियरिंग कॉरपोरेशंस एवं डिपॉजिटरीज भी शामिल हैं। इस प्रकार के सूचकांक से न केवल साइबर सुरक्षा कार्यान्वयन की निगरानी में सुधार होगा बल्कि समय-समय पर सेबी की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के कार्यान्वयन के स्तर को भी मापने में मदद मिलेगी।
वित्तीय प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को देगा बढ़ावा
सेबी ने वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि तीन-स्तरीय प्रणाली से साइबर सुरक्षा से संबंधित घटनाओं पर नजर रखने के साथ आवश्यक कार्रवाई भी जा सकेगी। इसके अलावा बाजार नियामक ने स्टॉक एक्सचेंज को उनकी विश्लेषणात्मक क्षमताओं को बढ़ाने का सुझाव दिया है ताकि सूचीबद्ध कंपनियों की ओर से एक्सबीआरएल प्रारूप में दी गई जानकारी के विश्लेषण में सुधार हो सके। सेबी ने कहा कि वह कुशल, निष्पक्ष और पारदर्शी प्रतिभूति बाजार पारिस्थितिकी तंत्र को विकसित करने और बनाए रखने के लिए वित्तीय प्रोद्योगिकी के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करेगा।