भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) उपभोक्ताओं को डीटीएच कंपनी बदलने पर बार-बार सेट टॉप बॉक्स की खरीदारी से मुक्त करने की तैयारी में है। ट्राई, उपभोक्ता के पक्ष में सेट टॉप बॉक्स के नियमों में बदलाव चाहता है ताकि एक ही सेट टॉप बॉक्स सभी कंपनियों के डीटीएच के लिए कारगर हो। ऐसा होने पर सेट टॉप बॉक्स के ई-कचरा के जमा पर भी रोक लगेगी। विभिन्न चैनल देखने के लिए डीटीएच सेवा लेने पर उपभोक्ता को डिस्क व सेट टॉप बॉक्स लेना पड़ता है।
अगर उपभोक्ता कुछ दिनों के बाद दूसरी कंपनी की सेवा लेता है तो उसे नए सेट टॉप बॉक्स लेने पड़ते हैं क्योंकि एक कंपनी दूसरी कंपनी के सेट टॉप बॉक्स को खारिज कर देती है। डीटीएच कंपनियां कहती हैं कि दूसरी कंपनी के सेट टॉप बॉक्स पर उनकी सेवा काम नहीं करेगी। यही वजह है देश में अभी 3 करोड़ सेट टॉप बॉक्स बेकार हैं और ई-कचरे के रूप में जमा हो रहे हैं। केबल क्षेत्र के विशेषज्ञ कर्नल केके शर्मा कहते हैं, विदेश में खासकर विकसित देश व यूरोप में एलईडी टेलीविजन के अंदर ही सेट टॉप बॉक्स लगे होते हैं। ऐसे में उपभोक्ता को डीटीएच कंपनी या केबल ऑपरेटर्स से सिर्फ कार्ड लेना पड़ता है।
ट्राई के आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल दिसंबर तक देश में 8.5 करोड़ सेट टॉप बॉक्स लगाए गए। इनमें से सिर्फ 5.5 करोड़ सेट टॉप बॉक्स सक्रिय मोड में है। बाकी के 3 करोड़ सेट टॉप बॉक्स बेकार हो चुके हैं या कचरे के रूप में जमा हो रहे हैं। ट्राई का कहना है कि डीटीएच कंपनियों के नियमों की वजह से बेकार पड़े बॉक्स के निर्माण में निवेश की गई राशि भी बेकार हो गई। ट्राई का मानना है कि अगर एक सेट टॉप बॉक्स को बनाने में 25 डॉलर का निवेश किया गया तो ऐसे में 75 करोड़ डॉलर की निवेश राशि बेकार हो गई।
ट्राई ने सेट टॉप बॉक्स को सभी कंपनियों की सेवा के लायक बनाने के मामले में स्टेकहोल्डर्स से राय देने के लिए कहा है। शर्मा कहते हैं, उपभोक्ताओं को इस बात की भी आजादी होनी चाहिए कि वे खुले बाजार से अपनी मर्जी के मुताबिक सेट टॉप बॉक्स की खरीदारी कर सकें। अभी तो उपभोक्ताओं को वही सेट टॉप बॉक्स लेना पड़ता है जो कंपनी देती है। कई बार उपभोक्ताओं को ज्यादा पावरफुल सेट टॉप बॉक्स की जरूरत नहीं होती है और वह अपनी जरूरत से अधिक डीटीएच कंपनी को इसकी खरीदारी में चुकाते हैं क्योंकि उपभोक्ता के पास कोई विकल्प नहीं होता है।