अक्तूबर में दुनिया के प्रमुख शेयर बाजारों में अच्छी खासी तेजी रही, पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में सबसे कम बढ़त रही। सेंसेक्स में 5.78% की तेजी जबकि निफ्टी-50 में 5.37% की तेजी रही। सबसे ज्यादा बढ़ने वालों में अमेरिका का डाऊजोंस रहा जिसमें 14.63% की बढ़ोतरी रही। सेंसेक्स पिछले 4 माह में 9,000 अंक बढ़ा है। जून मध्य में यह 51,260 पर था जो मंगलवार को 61 हजार को पार कर गया।
दुनिया के बाजारों में बढ़त इसलिए आई क्योंकि एक तो कच्चे तेलों की कीमतें गिरती गईं और दूसरे केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों को बढ़ाना जारी रखा। ब्याज दरें अप्रैल के बाद से 4-5 बार बढ़ चुकी हैं। विदेशी निवशकों की बिकवाली से भारतीय बाजार में कम बढ़त देखी गई।
रुपये में भी भारी गिरावट
रुपये में इस साल चार सबसे बड़ी गिरावट रही। मई में डॉलर के मुकाबले इसमें जहां 1.5% की गिरावट आई वहीं जून में यह 1.7% टूट गया। सितंबर में 2.4% टूटा जबकि अक्तूबर में 1.8% गिरकर बंद हुआ।
10 लाख करोड़ डॉलर होगा घरेलू बाजार का पूंजीकरण
ब्रोकरेज हाउस मोर्गन स्टेनली ने कहा है कि भारतीय शेयर बाजार का पूंजीकरण दस साल में 10 लाख करोड़ डॉलर को पार सकता है। इस आधार पर यह दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा पूंजीकरण वाला बाजार होगा। सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण 3.5 लाख करोड़ डॉलर है।
शेयर बाजारों में बढ़त
| देश |
बढ़ोतरी |
| जर्मनी |
9.54% |
| यूरो स्टोक्स-50 |
9.07% |
| फ्रांस |
8.83% |
| एसएंडपी-500 |
7.90% |
| फिलीपीन |
7.18% |
| द. कोरिया |
6.41% |
| जापान |
6.36% |
एक साल में पेटीएम के 44 फीसदी शेयर बेचे एफआईआई ने
निवेशकों को घाटा देने में अव्वल पेटीएम के शेयरों की विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने एक साल में 2.97 करोड़ शेयर या 44% हिस्सा को बेचा है। इसमें 127 एफआईआई की हिस्सेदारी थी जिन्होंने 6.71 करोड़ शेयर खरीदे थे। अब 88 एफआईआई की हिस्सेदारी केवल 3.74% रह गई है।