सोने की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ निवेशकों ने अक्तूबर में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में मुनाफावसूली को तवज्जो दी। इस महीने में निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ में लगभग 31 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जबकि इससे पिछले दो महीनों में लगभग 200 करोड़ रुपये का निवेश किया था। इसकी वजह मुख्य रूप से मुनाफावसूली रही।
श्रीवास्तव ने कहा, ‘बीच-बीच में आए उतार-चढ़ाव को छोड़ दें तो 2011 और 2012 की बड़ी तेजी के बाद से सोने की कीमतें काफी हद तक स्थिर ही रही हैं। इस साल सोने की चमक खासी बढ़ी और हाल के दौर में पीली धातु का यह सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा।’
क्वांटम म्यूचुअल फंड्स के वरिष्ठ कोष प्रबंधक (वैकल्पिक निवेश) चिराग मेहता ने कहा कि भारत में सितंबर के 40 हजार रुपये प्रति दस ग्राम के ऊपरी स्तर से सोना लगभग 2,000 रुपये टूट चुका है, लेकिन महीने के अंत में 2.30 फीसदी की मजबूती दर्ज की गई।
उन्होंने कहा, ‘दीर्घावधि में देखें तो किसी के पोर्टफोलियो में सोने के होने से जोखिम कम होगा और धीरे-धीरे रिटर्न में इजाफा होगा। किसी भी तरह की कीमतों में किसी भी तरह की गिरावट को गोल्ड ईटीएफ रूट के माध्यम से भुनाने वाले निवेशकों को फायदा होगा।’
बीते कुछ साल के दौरान खुदरा निवेशक अच्छे रिटर्न को देखते हुए गोल्ड ईटीएफ की तुलना में शेयर बाजार में ज्यादा पैसा लगा रहे हैं। बीते छह साल में गोल्ड ईटीएफ में कुल जितना निवेश हुआ, उसके बराबर महज पांच महीने में ही हो गया। निवेशकों ने 2018 में ईटीएफ से कुल 571 करोड़ रुपये निकाले, जो लगातार छठा साल रहा जिसमें इन उत्पादों में सकल बिकवाली की गई। इसकी तुलना में 2017 में 739 करोड़ रुपये निकाले गए थे।