वैश्विक व्यापार युद्ध की चिंता और अमेरिका में मंदी की बढ़ती आशंकाओं के बीच सोमवार को पूरी दुनिया के शेयर बाजार में भारी बिकवाली दिखी। भारतीय बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा और सेंसेक्स व निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांक लगभग तीन फीसदी की गिरावट के साथ बंद हुए। तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 2,226.79 अंक या 2.95 प्रतिशत टूटकर 73,137.90 अंक पर बंद हुआ। यह लगातार तीसरा दिन है जब सेंसेक्स में गिरावट दर्ज की गई। कारोबार के दौरान सूचकांक 3,939.68 अंक या 5.22 प्रतिशत गिरकर 71,425.01 अंक तक पहुंच गया था। दूसरी ओर, एनएसई निफ्टी 742.85 अंक या 3.24 प्रतिशत गिरकर 22,161.60 पर बंद हुआ। इंट्रा-डे में बेंचमार्क 1,160.8 अंक या 5.06 प्रतिशत गिरकर 21,743.65 तक पहुंचा। इस दौरान, निवेशकों को करीब 14 लाख करोड़ रुपये का चूना लगा।
सोमवार को घरेलू बाजार में हुई भीषण बिकवाली के बीच कुछ बड़ी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट दिखी। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर अपने 52 हफ्तों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया और 5% से अधिक की गिरावट के साथ बीएसई पर 1144.90 रुपये के भाव पर कारोबार करता दिखा। बीते छह दिनों में कंपनी के मार्केट कैप में करीब दो लाख करोड़ रुपये की गिरावट आई है। एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा, इंफोसिस, लार्सन एंड टूब्रो, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के शेयरों पर भी भारी बिकवाली का असर दिखा। मेटल सेक्टर के शेयरों का हाल सबसे खराब रहा।
ये भी पढ़ें: Market: शेयर बाजार में गिरावट पर कांग्रेस हमलावर, कहा- मोदी और ट्रंप अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने में माहिर
इक्विटी बाजार में में मंदी के रुख के कारण बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण एक ही दिन में 14,09,225.71 करोड़ रुपये की तेज गिरावट के साथ 3,89,25,660.75 करोड़ रुपये (4.54 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर) रह गया। भारत बाजार में उतार-चढ़ाव को मापने वाला इंडिया VIX 65.70% चढ़कर 22.79 अंकों पर पहुंच गया।बाजार में बढ़े भय के कारण इंडिया VIX में पहली बार एक दिन में इतना तेज उछाला। शेयरों में भारी बिकवाली के बीच वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट की कीमतें भी नीचे फिसल गईं। यह 2.74 प्रतिशत गिरकर 63.78 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
ट्रंप टैरिफ के बाद शेयर बाजार में आए भूचाल से एशियाई और अमेरिकी बाजारों में भी बड़ी बिकवाली आई है। एशियाई बाजारों में, हांगकांग का हैंगसेंग लगभग 11 प्रतिशत तक गिर गया है। टोक्यो का निक्केई 225 लगभग 7 प्रतिशत तक टूटा है वहीं, शंघाई एसएसई कम्पोजिट सूचकांक 6 प्रतिशत से की गिरावट के साथ कारोबार करता दिख रहा है। दक्षिण कोरिया के कोस्पी सूचकांक में भी पांच प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी बाजारों का हाल भी ऐसा ही रहा। एसएंडपी500 शुक्रवार को 5.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ। दूसरी ओर, नैस्डैक कंपोजिट में 5.82 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और डॉव 5.50 प्रतिशत तक फिसल गया।
पहले से विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली की मार झेल रहे भारतीय बाजार के लिए डोनाल्ड ट्रंप की ओर से घोषित जवाबी टैरिफ नया संकट बनकर सामने आया। एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को 3,483.98 करोड़ रुपये मूल्य की इक्विटी बेची। इस दौरान, सेंसेक्स 930.67 अंक या 1.22 प्रतिशत गिरकर 75,364.69 पर बंद हुआ। निफ्टी 345.65 अंक या 1.49 प्रतिशत गिरकर 22,904.45 पर बंद हुआ। पिछले सप्ताह सेंसेक्स में 2,050.23 अंक या 2.64 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि एनएसई निफ्टी में 614.8 अंक या 2.61 प्रतिशत की गिरावट आई।
ये भी पढ़ें: अमेरिकी टैरिफ से सहमा बाजार: सेंसेक्स 3900 तो निफ्टी 1100 अंक गिरकर खुला; निवेशकों को 20 लाख करोड़ का नुकसान
रिलायंस सिक्योरिटीज के शोध प्रमुख विकास जैन के अनुसार चीन और जापान दोनों सूचकांक में क्रमशः 10 प्रतिशत और 8 प्रतिशत की गिरावट आई है। वैश्विक व्यापार युद्ध और संभावित मंदी से जुड़ी चिंताएं बढ़ गई हैं और इससे निवेशकों की धारणा प्रभावित हो रही है। शुक्रवार को, यूएस एसएंडपी 500 में 6 प्रतिशत की गिरावट आई और डॉव जोन्स 2000 से अधिक अंक गिर गया। कोविड संकट के बाद से बाजार के लिए पिछला सप्ताह सबसे खराब साबित हुआ। दूसरी ओर, अमेरिकी टैरिफ के जवाब में चीन ने भी 10 अप्रैल से सभी अमेरिकी आयातों पर 34 प्रतिशत का जवाबी टैरिफ लगाने का एलान कर दिया है। इसे देखते हुए ऐसा लग रहा है अमेरिका और चीन की ओर से उठाए गए कदमों से मुद्रास्फीति और वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ सकता है। ऐसे में बाजार में तेज खरीदारी लौटने में थोड़ा समय लग सकता है।
2020 के कोविड क्रैश के बाद से सिर्फ दूसरी बार भारतीय बाजार एक ही दिन में 5% से ज्यादा गिरे हैं। निफ्टी अब अपने शिखर से 17% नीचे है। बेंचमार्क इंडेक्स आधिकारिक तौर पर 21,022 पर बियर मार्केट क्षेत्र में प्रवेश करने से अब महज 1,000 अंक से भी कम दूर है। स्टॉककार्ट के निदेशक और सीईओ प्रणय अग्रवाल ने कहा, "आज के ब्लैक मंडे ने भारतीय बाज़ारों को हिलाकर रख दिया है, लेकिन निवेशकों और व्यापारियों को शांत रहना चाहिए। अस्थिरता अवसर लाती है, लेकिन केवल मजबूत जोखिम प्रबंधन के साथ... याद रखें, यह भी बीत जाएगा।"
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के संजीव प्रसाद और उनकी टीम के विश्लेषकों के अनुसार, "पारस्परिक टैरिफ, भले ही अस्थायी हों पर इससे कंपनियों और निवेशकों के लिए अनिश्चितता बढ़ी है।" प्रसाद ने कहा, "अगले कुछ सप्ताहों में भारतीय बाजारों का प्रदर्शन इस बात पर निर्भर करेगा कि हितधारक देशों की ओर से टैरिफ की आग में पानी डाला जाता है या घी। इसके अलावे, भारत के खुदरा व घरेलू संस्थागत निवेशकों का व्यवहार भी बाजार की धारणा को प्रभावित करेगा। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि घटते रिटर्न और बढ़ती अस्थिरता घरेलू इक्विटी की मांग घटा सकती है।"